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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Gardeners will be able to produce more mangoes on less land, seven new Varieties will be found in Neri College

Hamirpur: कम भूमि पर बागवान कर सकेंगे आम की अधिक पैदावार, नेरी महाविद्यालय में मिलेंगी सात किस्में

Fri, 23 Jun 2023 10:45 AM IST
Krishan Singh पंकज राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, रंगस (हमीरपुर)
पंकज राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, रंगस (हमीरपुर) Published by: Krishan Singh Updated Fri, 23 Jun 2023 10:45 AM IST
सार

राजकीय उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी हमीरपुर में आम की सात नई किस्मों के ऊपर शोध कार्य में सफलता मिली है। यहां आम के ऊपर कई शोध केंद्रों पर अलग-अलग शोध कार्य चले हुए थे।

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Gardeners will be able to produce more mangoes on less land, seven new Varieties will be found in Neri College
आम की किस्में। - फोटो : istock

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के बागवान अब कम भूमि पर आम का अधिक उत्पादन कर अपनी आर्थिकी मजबूत कर सकेंगे। राजकीय उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी हमीरपुर में आम की सात नई किस्मों के ऊपर शोध कार्य में सफलता मिली है। यहां आम के ऊपर कई शोध केंद्रों पर अलग-अलग शोध कार्य चले हुए थे। आम की सघन खेती की यदि बात करें तो नेरी महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने सबसे पहले सफलता हासिल की है। वर्ष 2017 में पूसा श्रेष्ठ, पूसा अरुणिमा, पूसा सूर्या, अंबिका, अरुणिका, पूसा लालिमा और चौसा जैसी सात किस्में लाकर महाविद्यालय में आम की सघन खेती को लेकर शोध कार्य शुरू किया गया। शोध के दौरान कई तरह के ट्रायल महाविद्यालय में आम के बगीचे में किए गए। जहां पहले छह वर्ष से लेकर दस वर्ष के बाद आम के पौधों में फल आता था और फल को भी किसान आसानी से नहीं तोड़ पाता था। यही नहीं 10 मीटर की दूरी पर आम के पौधे रोप कर जहां भूमि का अधिकतर भाग बेकार रहता था और गुणवत्ता और पैदावार भी अपेक्षाकृत कम होती थी।

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अब नई तकनीक विकसित होने पर किसान ढाई से तीन मीटर की दूरी पर 1 हेक्टेयर भूमि में 1100 से लेकर 1300 तक उपरोक्त प्रजातियों के पौधे लगा सकते हैं। यही नहीं मात्र तीन वर्षों के अंतराल में लगने वाले आम के फलों को 5 साल तक का बच्चा भी आसानी से आम के नीचे खड़ा होकर तोड़ सकेगा। इसके अलावा मल्लिका, डी -51 दशहरी और आम्रपाली प्रजाति पर पहले ही महाविद्यालय में शोध कार्य किया जा चुका है। अध्ययन के दौरान नौणी विश्वविद्यालय की ओर से गठित टीम की ओर से समय-समय पर पौधे की कांटछांट करने की विधि से इसकी ऊंचाई को भी कम से कम करने का प्रयास किया गया है। शोध के दौरान फल विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शशि शर्मा और डॉ. अजय बन्याल ने सहयोगी टीम के रूप में जहां काम किया है। वहीं डॉ विकास शर्मा ने विशेष वैज्ञानिक के तौर पर शोध कार्य को आगे बढ़ाया है। महाविद्यालय के डीन डॉ. सोमदेव शर्मा ने आम की सघन खेती के शोध के दौरान बतौर प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर कार्य किया है। 

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