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किसान अगस्त के दूसरे पखबाड़े में तैयार करें फूलगोभी की पनीरी
Mon, 05 Aug 2019 12:47 PM IST
अरविन्द ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धर्मशाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धर्मशाला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 05 Aug 2019 12:47 PM IST
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डॉ. देशराज चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
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बरसात के मौसम में किसान टमाटर, बैंगन, लाल मिर्च, शिमला मिर्च, भिंडी और कद्दू आदि सब्जियों की देखभाल वैज्ञानिक ढंग से करें। किसान टमाटर की तैयार पौध की रोपाई 60.45 सेंटीमीटर (साधारण किस्म) और 90.60 सेंटीमीटर (संकर किस्मों) छोटा गड्ढा बनाकर करें। ध्यान रखें कि पौधों की कतारें और मेढे़ एक समान हों। खेत तैयार करते समय 10.0 किग्रा इफ्को मिश्रण खाद, 12 किग्रा म्यूरेट ऑफ पोटाश और 3.2 किग्रा यूरिया खाद का मिश्रण प्रति कनाल टमाटर की साधारण किस्मों में डालें।
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किसान संकर किस्मों के लिए 10 क्विंटल गोबर की खाद के अतिरिक्त 15 किग्रा इफ्को, 1.2 किग्रा म्यूरेट ऑफ पोटाश और 4.5 किग्रा यूरिया खाद प्रति कनाल खेतों में डालें। अगस्त के अंत में किसान फ्रांसबीन की सुधरी एवं झाड़ीनुमा किस्मों कंटेडर, पालम मृदुला, प्रीमियर, अर्का कोमल और पूसा पार्वती आदि की बिजाई पंक्तियों में 30-45 सेंमी और पौधों में 10-15 सेंमी की दूरी पर कर सकते हैं। बिजाई के लिए 3 किग्रा बीज तथा खेत तैयार करते समय 8 क्विंटल प्रति कनाल गोबर की गली-सड़ी खाद का प्रयोग करें। हरा प्याज उगाने के लिए जून में भंडारित की गई प्याज की छोटी-गांठों (सैट) की रोपाई ऊंची क्यारियां बनाकर या मेढ़ों पर करें।
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अगस्त के दूसरे पखवाड़े में 15 सेंमी पंक्तियों से पंक्तियों तथा 5-8 सेंमी गांठों से गांठोें की दूरी पर करें। किसान अगस्त के दूसरे पखवाड़े में फूलगोभी की दरम्याना किस्मों अगेहणी, पूसी, इम्प्रूबड़ जापनीज, मेघा (संकर), वरखा (संकर) व्हाइट एक्सल (संकर) आदि की पनीरी भी उगा सकते हैं। पनीरी उगाने के लिए तीन मीटर लंबी, एक मीटर चौड़ी तथा 10-15 सेंमी ऊंची क्यारियों में 20-25 किग्रा खूब गली-सड़ी गोबर की खाद, 250 ग्राम इफ्को मिश्रण खाद, 20-25 ग्राम इंडोफिल एम 45 तथा 15-20 ग्राम थीमेट या फोलीडॉल धूल-मिट्टी की ऊपरी सतह में मिलाने के बाद कतारों में 5 सेंमी की दूरी पर बीज की पतली बिजाई करें।
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अधिक वर्षा से पनीरी को बचाने के लिए क्यारियों के ऊपर छत का निर्माण करें और सूखी घास या पॉलिथीन की चादर छत के ऊपर रख दें। ऐसा करने पर वर्षा का सीधा पानी क्यारियों के ऊपर नहीं पड़ेगा और पौध स्वस्थ पैदा होगी। बंदगोभी एवं गांठगोभी की तैयार पौध की रोपाई पंक्तियों में 45-60 सेंमी और पौधों में 30-45 सेंमी की दूरी पर की जा सकती है।
इसी महीने बंदगोभी की सुधरी किस्मों (गोल्डन एकड़, प्राइड आफ इंडिया, पूसा मुक्ता, वरुण (संकर) व गांठगोभी (व्हाइट वियाना, परपल वियाना) की पनीरी भी उगाई जा सकती है। अगस्त के दूसरे पखवाड़े में जड़दार सब्जियों मूली, (जापानीज व्हाइट, चाइनीज पिंक, मीनो अर्ली, आलसींजन), गाजर (पूसा केसर, नांतीज, चांतनी) व शलगम (पीटीडब्ल्यूजी) की सीधी बिजाई पंक्तियों में 20-25 सेंमी की दूरी पर करें।
खेत तैयार करते समय 4-5 क्विंटल गोबर की गली-सड़ी खाद और बिजाई के समय 6.3 किग्रा इफ्को मिश्रण खाद, 0.7 किग्रा म्यूरेट ऑफ पोटाश व 3.5 किग्रा यूरिया खादों का मिश्रण प्रति कनाल डालें। पालक की सुधरी किस्में (पूसा हरित, आल ग्रीन, बनर्जी जांयट, पूसा भारती) की बिजाई पंक्तियों में 25-30 सेंमी की दूरी पर प्रति कनाल 1.0 किग्रा बीज का प्रयोग कर की जा सकती है। बरसात के मौसम में सभी प्रकार की सब्जियों में जल निकासी का उचित प्रबंध करें और खरपतवारों का नियंत्रण करें।
कद्दू वर्गीय सब्जियों में फल मक्खी की समस्या से निपटने को खेतों में पालम टैप लगाएं तथा मैलाथियॉन रसायन 15 मिलीलीटर प्रति 15 लीटर पानी का छिड़काव फसल पर करें। इस रसायन का छिड़काव खेत की मेढ़ों पर भी करें। बैंगन में तना एवं फल छेदक कीट की रोकथाम के लिए साइपरमैथिरिन नामक रसायन का 25 मिलीलीटर प्रति 15 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। आवश्यकतानुसार 10 से 15 दिन के अंतराल पर पुन: छिड़काव किया जा सकता है।
डॉ. देशराज चौधरी 21 वर्ष से सब्जियों की बेहतर पैदावार पर काम कर रहे हैं। सब्जी पैदावार को लेकर वह किसानों लगातार जागरूक करने का काम कर रहे हैं। वर्तमान में डॉ. देशराज चौधरी कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के प्रसार शिक्षा निदेशालय में प्राध्यापक सब्जी विज्ञान के रूप में काम कर रहे हैं।