आजादी के बाद हिमाचल का पहला तोहफा है वल्लभ कॉलेज
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ब्रिटिश राज खत्म होने के एक वर्ष बाद 1948 में स्थापित नैक से ए ग्रेड मान्यता प्राप्त वल्लभ कॉलेज मंडी में पढ़ना हर स्टूडेंट का सपना है। कॉलेज में कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय की यूजी डिग्री के साथ पीजी की पढ़ाई की जा सकती है।
मंडी कॉलेज में बीएड, पीजीडीसीए, बीसीए तथा एमए राजनीतिक शास्त्र के विद्यार्थियों ने गत शैक्षणिक सत्र में मेरिट में जगह बनाई है। कॉलेज में लाहौल-स्पीति, कुल्लू, हमीरपुर, बिलासपुर के विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। खेलों में अग्रणी मंडी कॉलेज के विद्यार्थियों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम चमकाया है।
किस विषय में कितनी सीटें
रूसा सीबीसीएस यूजी कोर्स (मेजर)
फिजिक्स 140
केमिस्ट्री 140
मैथेमेटिक्स 140
बॉटनी 140
जूलॉजी 140
बायोटेक 60
राजनीतिक शास्त्र140
अंग्रेजी 140
इतिहास 140
हिंदी 140
अर्थशास्त्र 140
लोक प्रशासन 80
भूगोल समाज शास्त्र 140
कॉमर्स 140
संस्कृत 80
समाज शास्त्र 80
म्यूजिक 80
पीजी कोर्स में इतनी सीटें
एमए हिंदी 35
एमए राजनीतिक शास्त्र 35
एमए अंग्रेजी 35
एमए अर्थशास्त्र 35
एमएससी मैथेमेटिक्स 35
एमकॉम 35
बीएड 100
पीजीडीसीए 60
बीसीए 60
बीबीए 60
सुविधाएं
साइंस फिजिक्स, केमिस्ट्री, भूगोल, कंप्यूटर, भाषा की आधुनिक प्रयोगशालाएं। तीन कंप्यूटर लैब में 140 स्टूडेंट एक साथ बैठ सकते हैं। आधुनिक सेमिनार हॉल, 50 हजार किताबों वाली लाईब्रेरी, रीडिंग सेक्शन, छात्राओं के दो छात्रावास में 200 छात्राओं व एक ब्यायज हॉस्टल में 126 छात्रों के ठहरने की सुविधा बास्केटबाल और बालीबाल कोर्स के अलावा कॉलेज में इंडोर स्टेडियम तथा मल्टीपर्पस हाल की सुविधा भी उपलब्ध है।
यहां से निकली नामी हस्तियां
पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम, क्रिकेटर ऋषि धवन, वर्तमान में कॉलेज में कार्यरत प्राचार्य डा. अशोक अवस्थी, स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह, पूर्व मंत्री गुलाब सिंह, पूर्व मंत्री जयराम ठाकुर। वल्लभ कॉलेज मंडी में 5200 से अधिक छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। कॉलेज की स्थापना वर्ष 1948 में हुई है।
कॉलेज में शहर के यू ब्लॉक के प्राइमरी स्कूल में कक्षाएं शुरू की गई थी। पहले शैक्षणिक सत्र में 198 स्टूडेंट ने प्रवेश लिया था। प्रदेश में सबसे पहले नैक से ए ग्रेड मान्यता प्राप्त करने का गौरव भी मंडी कॉलेज को ही हासिल है। मंडी कॉलेज देश के सबसे पुराने चुनिंदा कॉलेज की लिस्ट में शुमार है।
शिक्षा के साथ ही खेलों में भी कॉलेज के स्टूडेंट को परिपक्व बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। कॉलेज में मंडी के अलावा बाहरी जिलों के स्टूडेंट भी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। - डा. अशोक अवस्थी, प्रिंसिपल