इस विषय में पीएचडी की प्रवेश प्रक्रिया पर लगी रोक
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एचपीयू में पहली बार इस विभाग में पीएचडी शुरू करने के लिए प्रवेश की प्रक्रिया अनिश्चितकाल के लिए रुक गई है। उच्च न्यायालय ने योग विषय में पीएचडी की 12 सीटों को भरने के लिए साक्षात्कार के साथ अंकों की मेरिट बनाने के विवि कार्यकारी परिषद के फैसले पर रोक लगा दी है।
निर्णय के बाद वीरवार 19 अप्रैल को तय की गई साक्षात्कार की प्रक्रिया भी विभाग ने रोक दी है। इसमें बाहरी राज्यों से एक्सपर्ट साक्षात्कार (वाइवा) के लिए बुलाए गए थे। मंगलवार को न्यायालय से फैसला आने पर विभाग ने प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
प्रवेश परीक्षा के आधार पर पात्र 61 प्रतिभागियों को मोबाइल पर साक्षात्कार रद्द करने की सूचना दे दी है, बावजूद वीरवार को दो पात्र उम्मीदवार महिलाएं विवि पहुंच गई थीं।
यहां जानिए पूरा मामला
योग विभाग के कार्यवाहक विभागाध्यक्ष प्रो. हिम चटर्जी ने माना कि न्यायालय ने पीएचडी की 12 सीटों को भरने के लिए हुई प्रवेश परीक्षा के प्राप्तांक, नेट सेट, और जेआरएफ के लिए बीस अंक के अलावा बीस अंक के साक्षात्कार को मिलाकर कुल 120 में से मेरिट बनाने का फैसला लिया था।
यानी 120 में 80:20:20 अंक में से मेरिट बनाई जानी थी। ईसी के फैसले के बाद 19 अप्रैल को साक्षात्कार रखा गया था। इस पर न्यायालय ने रोक लगाने के आदेश दिए हैं इससे प्रवेश प्रक्रिया अनिश्चितकाल के लिए रोक दी है।
विवि के योग विभाग में 2016 में एमफिल और पीएचडी की 12 सीटें भरे जाने का फैसला लिया गया था। एमफिल का एक बैच जरूर बिठा दिया गया, मगर पीएचडी की विज्ञापित की गई सीटों के लिए 27 सितंबर 2017 को प्रवेश परीक्षा हुई।
इसमें देश भर से 61 परीक्षार्थियों ने प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की। पीएचडी में प्रवेश को प्रदेशभर से पात्र उम्मीदवार न मिलने के कारण मेरिट 120 अंकों से बनाए जाने का निर्णय लिया था। इसमें 20 अंकों का साक्षात्कार रखा गया था। ईसी की मंजूरी के बाद विभाग ने 19 को साक्षात्कार रखे थे।