अगले सत्र से इतने साल में कर सकेंगे बीए बीएड, बढ़ेगी इनकी मुश्किलें
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हिमाचल में बीएड कोर्स अब दो वर्ष का नहीं होगा। अगर केंद्र सरकार के आदेशों पर अमल हुआ तो अगले साल से छात्र बीए बीएड चार साल में कर सकेंगे। अभी तक बीए करने में तीन और उसके बाद बीएड करने के लिए दो साल लगते हैं।
दरअसल दो वर्षीय बीएड कोर्स को बदलकर अब चार वर्षीय बीए बीएड, बीएससी बीए और बीकॉम बीएड इंटीग्रेटिड कोर्स के रूप में पढ़ाए जाने की तैयारी है । मानव संसाधन विकास मंत्रालय इसे हरी झंडी दे चुका है, तो एनसीटीई के रेगुलेशन-2014 में इसे पहले ही शामिल किया गया है।
इससे जाहिर है कि दो वर्षीय बीएड कोर्स बंद हो जाएगा। संभव है कि 2018-19 के सत्र की शुरू होने वाली बीएड कोर्स की प्रवेश प्रक्रिया के बाद यह अंतिम दो वर्षीय बीएड कोर्स का बैच हो।
कोर्स को चार साल का इंटीग्रेटिड किए जाने की सूचना ने प्रदेश में चल रहे करीब 72 निजी बीएड कॉलेज संचालकों की नींद उड़ा दी है। इंटीग्रेटिड कोर्स के बारे में निजी बीएड कॉलेज आपत्तियां मानव संसाधन विकास मंत्रालय में दर्ज करवा चुके हैं।
अभी तक केंद्र या प्रदेश सरकार की ओर से इंटीग्रेटिड कोर्स शुरू करने को लेकर कोई निर्देश नहीं आए हैं। मगर यह माना जा रहा है कि इसे 2019 के सत्र से पूरे देश भर में शुरू करने की तैयारी है। ऐसे मे निजी बीएड कॉलेज संचालक परेशान हैं। अब केंद्र क्या फैसला लेगा, इसका प्रदेश विवि सहित निजी बीएड कॉलेजों और प्रदेश सरकार को भी इंतजार है।
इंटीग्रेटिड कोर्स शुरू करने से बढ़ेंगी मुश्किलें : मुकेश
वर्तमान में विवि से संबद्ध 72 निजी और दो सरकारी कॉलेजों में 7500 के करीब बीएड कोर्स की सीटें हैं। नए सत्र में प्रवेश के लिए विश्वविद्यालय प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। शिक्षा विभाग की डीन प्रो. सुदर्शना राणा का कहना है कि जल्द प्रवेश शेडयूल जारी होगा।
इसको लेकर एक बैठक हो चुकी है। चार वर्षीय कोर्स को लेकर कोई ताजा आदेश नहीं मिले हैं। प्रदेश निजी बीएड कॉलेज संघ के अध्यक्ष मुकेश शर्मा का कहना है दो वर्षीय कोर्स को बदलकर चार साल का इंटीग्रेटिड कोर्स 2019 से शुरू करने की चरचा है।
इससे निजी बीएड कॉलेज संचालकों के साथ छात्रों की मुश्किलें भी बढ़ेंगी। एमएचआरडी को संघ ने अपनी दिक्कतों से अवगत करवाया है। अभी बीएड को दो साल का किए जाने के बाद दूसरा बैच भी नहीं निकला है।
जो यूजी कर निकले हैं, वे कैसे बीएड कर पाएंगे। वहीं निजी कॉलेज संचालकों को भी चार वर्षीय कोर्स को आधारभूत, ढांचागत सुविधाएं, अतिरिक्त शिक्षकों की भर्ती करना मुश्किल होगा।