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नेट साल में एक बार करवाने पर एसएफआई उग्र, फैसला वापस लेने की मांग

Sat, 24 Jun 2017 12:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 24 Jun 2017 12:19 PM IST
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SFi protest in Hpu shimla

एसएफआई की विश्वविद्यालय इकाई ने नेट साल में एक बार करवाने के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के फैसले का शुक्रवार को विरोध किया। आल इंडिया एसएफआई कमेटी के आह्वान पर एचपीयू में एसएफआई कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और एमएचआरडी मंत्रालय के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर इस फैसले को वापस लेने की मांग रखी। 

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छात्र नेता सुनील और नोवल ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार का यह फैसला छात्र और शिक्षा विरोधी है।  यूजीसी ने जुलाई माह में नेट नहीं करवाया और अब इसे 19 नवंबर को तय किया गया है। इससे साफ है कि देश के छात्रों को अब साल में एक बार नेट देने का मौका मिलेगा। नेट पास करने का प्रतिशत भी 15 से 6 फीसदी सालाना कर दिया है। 
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उन्होंने कहा कि यह सरकारी शिक्षण संस्थानों, यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को बंद करने और शोध कार्य समाप्त करने की साजिश है, जब नेट पास छात्र नहीं होंगे, तो उनमें जेआरएफ कम हो जाएंगे। वहीं शिक्षण संस्थानों को शिक्षकों के पदों के लिए नेट क्वालिफाई नहीं मिलेंगे। पहले भी केंद्र सरकार ने नॉन नेट फेलोशिप बंद की थी। 
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यह सब नीति दस्तावेज के बिना किया जा रहा है। वहीं यूजीसी के बजट में 32 फीसदी की कटौती की गई है। केंद्र की सरकार शिक्षा को भी अब डब्लूटीओ के दायरे में लाने के प्रयास कर रही है। इसमें शिक्षा को निजी हाथों में देकर कारोबारियों को लाभ देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इन तमाम फैसलों को वापस नहीं लेती तो एसएफआई देशव्यापी आंदोलन खड़ा करेगी। 

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