पीएचडी में सीधे प्रवेश पर एचपीयू शिमला में एसएफआई का प्रदर्शन, एनएसयूआई ने राज्यपाल को सौंपा मांग पत्र
एसएफआई के प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष विवेक राज ने कहा कि विवि में पीएचडी में दाखिले में हुए घोटाले की न्यायिक जांच करवाई जाए। यूजीसी और विवि के अध्यादेश का उल्लंघन करते हुए चहेतों को सीधे प्रवेश दिया गया है।
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पीएचडी में बिना परीक्षा प्रवेश दिए जाने का विरोध बढ़ रहा है। शुक्रवार को एसएफआई ने विवि में प्रदर्शन किया। इस दौरान एचपीयू पहुंचे राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के सामने कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और ज्ञापन सौंपा। प्रवेश को तुरंत रद्द किए जाने की मांग की। एसएफआई के प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष विवेक राज ने कहा कि विवि में पीएचडी में दाखिले में हुए घोटाले की न्यायिक जांच करवाई जाए। यूजीसी और विवि के अध्यादेश का उल्लंघन करते हुए चहेतों को सीधे प्रवेश दिया गया है। आरोप लगाया कि शिक्षक भर्ती में भी योग्य लोगों को दरकिनार कर चहेतों को भर्ती किया गया है। इन शिक्षकों के लिए अतिरिक्त सीटें आरक्षित की गई हैं। अतिरिक्त सीट आरक्षित किए जाने के बाद कॉलेजों में पढ़ा रहे शिक्षकों को इसके लिए आवेदन करने का मौका नहीं मिला। विवि को एक विचारधारा विशेष के लोगों का अड्डा बनाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रवेश पर विवाद खड़ा होने पर भी सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह सिर्फ अपने चहेतों का पीएचडी में प्रवेश दिलवाने की साजिश है। विज्ञापित सीटों से अधिक सीटें भरी गई हैं।
वहीं, एनएसयूआई ने शुक्रवार को विवि परिसर आए राज्यपाल को मांग पत्र सौंपकर पीएचडी में सीधे प्रवेश के मामले की जांच करवाने की मांग की। कार्यकर्ताओं ने परिसर में धरना-प्रदर्शन करने के बाद राज्यपाल के समक्ष प्रदर्शन किया। एनएसयूआई इकाई के राज्य उपाध्यक्ष वीनू मेहता, राज्य महासचिव यासीन भट्ट, एचपीयू परिसर अध्यक्ष प्रवीण मिन्हास, रजत भारद्वाज, प्रवीण कंवर, अभय, रमेश और रमेश कुमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पीएचडी में यूजीसी और विवि आर्डिनेंस को नजर अंदाज करते हुए ईसी से प्रस्ताव को मंजूरी दिलवाकर अधिकारियों के लाडलों को सीधे प्रवेश दिया गया। सीधे प्रवेश का प्रावधान कर नियमों को नजरअंदाज किया गया। यह लाभ सिर्फ तीन आलाधिकारियों के बच्चों को दिलवाया गया। संगठन ने कहा कि अयोग्य लोगों को सीधे पीएचडी में प्रवेश देने से आने वाले समय में विवि में शोध की गुणवत्ता भी गिरेगी।