{"_id":"57c3cc194f1c1bbd4e2caf95","slug":"research-fund-for-junior-faculty-in-medical-colleges","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेडिकल कॉलेजों की जूनियर फैकल्टी को भी मिलेगा रिसर्च फंड","category":{"title":"Campus","title_hn":"कैंपस ","slug":"campus"}}
मेडिकल कॉलेजों की जूनियर फैकल्टी को भी मिलेगा रिसर्च फंड
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 29 Aug 2016 11:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश सरकार के आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कॉलेज की जूनियर फैकल्टी को अब रिसर्च वर्क करने के लिए वित्तीय संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकार दोनों मेडिकल कॉलेजों की जूनियर फैकल्टी के लिए भी रिसर्च फंड की व्यवस्था करेगी। रिसर्च फंड लेने के लिए प्रक्रिया तो पुरानी रहेगी, लेकिन अब जूनियर फैकल्टी को अकेले रिसर्च करने पर भी वित्तीय सहयोग मिल जाएगा।
विज्ञापन
सरकार हर साल प्रदेश के दोनों मेडिकल कॉलेजों में रिसर्च वर्क के लिए करीब एक करोड़ रुपये खर्च करती है। अभी तक इन रिसर्च के लिए संस्थान की सीनियर फैकल्टी के नेतृत्व वाली टीम को रिसर्च प्रोजेक्ट की ग्रेविटी के अनुसार वित्तीय सहायता दी जाती थी, लेकिन जूनियर फैकल्टी को इंडीपेंडेंट रिसर्च वर्क के लिए वित्तीय सहायता नहीं दी जाती थी। मार्च में सीएम वीरभद्र सिंह ने जूनियर फैकल्टी को भी रिसर्च में आगे आने के लिए यह व्यवस्था करने की घोषणा की थी।
विज्ञापन
निदेशक स्वास्थ्य शिक्षा केपी चौधरी ने बताया कि इंट्रामूरल रिसर्च फंड के लिए किसी भी फैकल्टी मेंबर को अपने संस्थान के प्रिंसिपल को रिसर्च प्रोजेक्ट भेजना होता है। कालेज की एकेडमिक कमेटी प्रोजेक्ट की ग्रेविटी देखती है और फिर उस रिसर्च पर आने वाले खर्च और रिसर्च की प्रासंगिकता को देखती है। इसके बाद रिसर्च के लिए विभाग फंड जारी करता है। जूनियर फैकल्टी को भी अब इसी आधार पर रिसर्च के लिए फंड मिलेगा।
विज्ञापन