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पीएचडी प्रवेश पर बवाल: एबीवीपी ने कैंपस में नारेबाजी, एसएफआई भी उग्र

Mon, 18 Oct 2021 08:11 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 18 Oct 2021 08:11 PM IST
सार

सोमवार को एबीवीपी ने अधिकारियों के बच्चों को प्रवेश देने को विशेष प्रावधान करने और उन्हें प्रवेश दिए जाने के खिलाफ परिसर में धरना-प्रदर्शन किया।  समरहिल चौक और परिसर में धरना प्रदर्शन कर विवि प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। 

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PhD admission case: SFI opened front, agitation if the decision is not withdrawn
एचपीयू में प्रदर्शन करते एबीवीपी कार्यकर्ता। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पीएचडी में आलाधिकारियों  के बच्चों को सीधे प्रवेश देने के मामले पर बवाल खड़ा हो गया है। इस फैसले के खिलाफ छात्र संगठन मुखर हो गए है। सोमवार को एबीवीपी ने अधिकारियों के बच्चों को प्रवेश देने को विशेष प्रावधान करने और उन्हें प्रवेश दिए जाने के खिलाफ परिसर में धरना-प्रदर्शन किया।  समरहिल चौक और परिसर में धरना प्रदर्शन कर विवि प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। नेताओं ने कहा कि विवि के शिक्षकों और कर्मचारियों के बच्चों को बिना नेट जेआरएफ और प्रवेश परीक्षा के सीधे प्रवेश पर कहा कि यह न्यायसंगत नहीं है। इकाई सचिव आकाश नेगी ने कहा कि एबीवीपी इसका विरोध करती है। अधिकारियों और कर्मचारियों के बच्चों को तय नियमों के छूट देकर प्रवेश देना आम छात्रों के साथ धोखा है। विभागों की पीएचडी की सीटों को बढ़ाने की एबीवीपी की मांग को लगातार नजरअंदाज किया। नियमों का हवाला देकर नकार दिया जाता है। वहीं अपने बच्चों के लिए विशेष प्रावधान कर सीधे प्रवेश दिया जा रहा है। विवि यह फैसला लेकर यूजीसी नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है। नेगी ने विवि प्रशासन और प्रदेश सरकार से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग उठाई। फैसला वापस न लिया तो, एबीवीपी आने वाले समय में आंदोलन और उग्र करेगी। 

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विवि की सफाई; गरीब कर्मचारियों के बच्चों के लिए लिया फैसला
 अमर उजाला खबर प्रकाशित होने के बाद विवि ने सफाई दी है। इसमें कहा गया है कि पांच वर्ष पूर्व अकादमी परिषद की स्थायी समिति की सिफारिश पर विवि कार्यकारिणी परिषद ने स्ववित्तपोषण में कर्मचारियों के बच्चों को पीएचडी में प्रवेश के प्रस्ताव को अनुमोदित किया था। सफाई में कहा गया है कि इस निर्णय से विवि के निमभन वर्ग के कर्मचारियों के बच्चों को उच्च शिक्षा का अवसर मिलेगा। स्ववित्त पोषण में पूर्व में स्वीकृत शुल्क माफ करने के लिए कर्मचारियों की मांग पर कार्यकारिणी परिषद की 21 अगस्त को हुई बैठक में मौके पर चर्चा के बाद एक लाख रुपये के शुल्क के एक मुश्त भुगतान के उपरांत पीएचडी डिग्री में नियमित प्रवेश की स्वीकृति प्रदान की गई। इसी बैठक में ईसी ने विवि और कॉलेजों के सहायक आचार्यों के लिए पीएचडी की एक एक अतिरिक्त सीट का प्रावधान करने को भी स्वीकृति दी थी। इसकी अधिसूचना जारी की गई थी। सफाई में यह भी कहा गया है कि हर विभाग में पीएचडी में प्रवेश के लिए एक अतिरिक्त सीट शारीरिक रूप से विकलांग छात्रों के लिए भी आरक्षित है। 

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