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नीट की हिमाचल मेरिट में ईशिता आजाद टॉपर, यहां देखिए पूरी सूची

Wed, 03 Jul 2019 10:18 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 03 Jul 2019 10:18 PM IST
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neet result 2019: Ishita Azad topper in himachal Merit
टॉपर ईशिता आजाद अभिभावकों के साथ - फोटो : अमर उजाला

नेशनल एलिजिविलिटी कम एंट्रेस टेस्ट (नीट) की हिमाचल विश्वविद्यालय ने प्रदेश की मेरिट सूची बुधवार को जारी कर दी है। संयुक्त स्टेट मेरिट में ईशिता आजाद पहला स्थान हासिल कर प्रदेश की टॉपर बनी है। ईशिता ने नीट परीक्षा मेरिट में 187वां रैंक पाया था।

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शैक्षणिक सत्र 2019-20 के लिए मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में प्रवेश के लिए कुल 3104 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। एचपीयू ने श्रेणी वार मेरिट लिस्ट जारी कर विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध करवा दी है। एमबीबीएस की सरकारी कॉलेजों में 720 सीटें हैं, जबकि बीडीएस की 75 हो सकती हैं।
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 प्रदेश विश्वविद्यालय की ओर से बुधवार को नीट के आधार पर जारी की गई मेरिट पर ही पांच जुलाई से विवि में एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में प्रवेश के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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मेरिट में पहला स्थान हासिल करने वाली ईशिता आजाद कांगड़ा जिले के महाकाल बैजनाथ की रहने वाली हैं। मेरिट में कांगड़ा के ही पंचरुखी के श्रदुल पंडित ने दूसरा, अल्का ने तीसरा, उदय प्रताप सिंह ने चौथा स्थान हासिल किया है।

वहीं स्टेट मेरिट में अमन ठाकुर ने पांचवां, रूहानी ने छठा,विशाल सिमर ने सातवां और सोनल ठाकुर ने आठवां स्थान पाया है। इसके अलावा मेरिट में नौवें रैंक पर इरिका राणा और मीनाक्षी वाधवा ने दसवां रैंक पाया है।

मेरिट में अरुल सूद, यामिनी शर्मा, विपुल केस्टा, हरलीन कौर, रोहित वर्मा और रिया शर्मा ने क्रमश: ग्यारहवां, बारहवां, तेहरवां, चौदहवां, पंद्रहवां और सोलहवां रैंक हासिल किया है।

सफल हार्ट सर्जन बनना चाहती हैं टॉपर ईशिता आजाद 

स्टेट मेरिट में पहला रैंक पाने वाली बैजनाथ महाकाल की छात्रा ईशिता आजाद का सपना सफल हार्ट सर्जन बनना सपना है। इसके लिए वह अभी तक मेहनत करती रही हैं।

एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद आगे कार्डियोलॉजी में स्पेशलाइजेशन करने के बाद एक सफल हार्ट सर्जन बनकर लोगों की सेवा करेंगी। ईशिता के पिता विनोद कुमार राजनीति शास्त्र के लेक्चर और माता अर्थशास्त्र की लेक्चर ने हमेशा बेटी को पढ़ाई में हर तरह से सहयोग किया।

रोजाना आठ घंटे तक पढ़ाई कर ईशिता ने यह मुकाम हासिल किया है। माता पिता बेटी के सपने के पूरा होने की इस पहली सीढ़ि को पार करते देख फूले नहीं समा रहे है।  

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