{"_id":"5b3730a64f1c1bc2378b69ee","slug":"neet-mbbs-bds-counselling-in-hpu-shimla-and-himachal-high-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रदेश से बाहर पढ़े दस अभ्यर्थी एमबीबीएस काउंसलिंग से बाहर","category":{"title":"Campus","title_hn":"कैंपस ","slug":"campus"}}
प्रदेश से बाहर पढ़े दस अभ्यर्थी एमबीबीएस काउंसलिंग से बाहर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Updated Sat, 30 Jun 2018 12:57 PM IST
विज्ञापन
काउंसलिंग देर रात तक जारी रही।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एचपीयू में एमबीबीएस और बीडीएस की काउंसलिंग में करीब दस अभ्यर्थी नई शर्त के कारण काउंसलिंग में या तो हिस्सा नहीं ले पाए, या फिर उन्हें सीट आवंटित नहीं की गई। ऐसे अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों ने काउंसलिंग कमेटी के समक्ष और बाहर आकर रोष व्यक्त किया। ये वे अभ्यर्थी थे, जिनके अभिभावक निजी कारोबार या नौकरी के लिए प्रदेश के बाहर ही रहे और वहीं से बच्चे की पढ़ाई करवाई।
विज्ञापन
पात्रता शर्त के नए क्लाज के तहत इन्हें रिजेक्ट किया गया था। इन अभिभावकों में एक ऐसे थे जो केंद्र सरकार के एक निगम में सेवारत हैं। उन्हें काउंसलिंग में हिस्सा लेने दिया गया, मगर उन्हें सीट आवंटित नहीं की गई। जबकि उनका बच्चा नीट की प्रदेश मेरिट में टॉप छह में था। अभ्यर्थी के पिता केंद्र सरकार के कर्मी हैं, बावजूद इसके उन्हें सीट नहीं दी गई।
विज्ञापन
उधर, एक अन्य अभिभावक ने कहा कि उनकी बेटी टॉप दस में है, मगर उन्हें सिर्फ इसलिए बाहर किया गया। क्योंकि बच्चे की पढ़ाई बाहरी राज्य से थी। ऐसे ही कई अन्य अभिभावकों ने जमकर अपना गुस्सा जाहिर किया और कहा कि उनसे उनका हिमाचली होने के नाते मिला अधिकार छीना जा रहा है। यह उनके बच्चों के साथ अन्याय है। इसको लेकर वे न्यायालय जाएंगे।
विज्ञापन
देरी से शुरू हुई काउंसलिंग- सुबह करीब एक घंटा देरी से शुरू हुई काउंसलिंग देर रात तक जारी रही। नीट हिमाचल प्रदेश काउंसलिंग कमेटी के अध्यक्ष व निदेशक चिकित्सा शिक्षा की अध्यक्षता और विवि के परीक्षा नियंत्रक डा. जेएस नेगी की देखरेख में यह काउंसलिंग शुरू हुई। पहले दिन सामान्य वर्ग की संयुक्त मेरिट के 1 से 150 रैंक तक और वार्ड ऑफ एक्स सर्विसमैन के 1 से 77, वार्ड आफ डिफेंस पर्सनल मेरिट में 1 से 51 रैंक तक आने वाले और दिव्यांग श्रेणी के 1 से 13 रैंक के अभ्यर्थियों की काउंसलिंग हुई।
हाईकोर्ट ने दी राहत- हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश से बाहर प्राइवेट नौकरी करने वाले हिमाचलियों के याचिकाकर्ता विद्यार्थियों को एमबीबीएस और बीडीएस काउंसलिंग में भाग लेने का मौका देने के आदेश दिए हैं। लेकिन छात्र यह न समझें कि उनका दाखिले के लिए अधिकार पक्का हो गया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एमबीबीएस कोर्स में दाखिला कोर्ट के आगामी आदेशों पर निर्भर करेगा।
इन छात्रों में एक श्रेणी वह है जिनके अभिभावक सरकारी नौकरी में हैं या कभी रहे थे, जबकि दूसरी श्रेणी में वह छात्र हैं जिनके अभिभावक निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं या कभी रहे थे। अभिभावकों की राज्य से बाहर नौकरी होने के कारण यह छात्र हिमाचल के किसी स्कूल से जरूरी दो कक्षाएं पास नहीं कर सके।
जबकि प्रदेश के कोटे के तहत यह नियम है कि छात्र ने कम से कम दो चुनिंदा कक्षाएं हिमाचल के स्कूलों से पास की हों। सरकार ने मौजूदा सत्र में इस नियम की उन छात्रों को छूट दी जिनके अभिभावक सरकारी कर्मी हैं या कभी रहे हों। निजी क्षेत्र में काम करने वाले अभिभावकों के बच्चों ने इस छूट का लाभ मांगते हुए कहा कि उनके साथ सरकार भेदभाव कर रही है।
शैक्षणिक सत्र 2013-14 से दोनों तरह के छात्रों को दाखिले में छूट दी गई थी जबकि इस बार उन्हें यह छूट नहीं दी जा रही है। प्रार्थियों की दलील को मद्देनजर कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि किस आधार पर सरकारी कर्मियों के बच्चों को दो कक्षाओं संबंधी नियम से छूट दी गई।
इसके पीछे सरकार क्या उद्देश्य रहा है। कोर्ट ने प्रदेश से बाहर कार्यरत या सेवानिवृत्त कर्मियों के उन बच्चों का ब्योरा मांगा है जिन्होंने इस कोर्स के लिए आवेदन कर रखा है ताकि उनकों याचिकाओं में प्रतिवादी बनाया जा सके और वह कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रख सकें।
न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी व न्यायाधीश विवेक ठाकुर की खंडपीठ ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया किया है। न्यायालय ने इसके अलावा दोनों श्रेणी के उन छात्रों का भी ब्योरा मांग लिया है जिन्हें वर्ष 2013 से वर्ष 2017 तक इस छूट का लाभ दिया जा चुका है। मामले पर सुनवाई 3 जुलाई को होगी।