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एमबीबीएस/बीडीएस सीटों के आवंटन पर फैसला कल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 15 Jul 2018 01:28 PM IST
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एमबीबीएस/बीडीएस काउंसलिंग सीटों के आवंटन पर सोमवार को फैसला होगा। दरअसल एमबीबीएस कोर्स में स्टेट कोटा के तहत प्रवेश के लिए लागू नई पात्रता शर्त के मामले पर उच्च न्यायालय के फैसले पर अमल करने को लेकर सोमवार को चिकित्सा शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में एमबीबीएस/बीडीएस काउंसलिंग कमेटी की बैठक होगी।
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चरचा के बाद ही कमेटी एमबीबीएस की सीटों के आवंटन में पात्र अभ्यर्थियों पर आम सहमति से निर्णय लेगी और सीट आवंटन की प्रक्रिया तय करेगी। 29 जून से 5 जुलाई तक प्रदेशभर के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के लिए पूरी की गई काउंसलिंग प्रक्रिया के बाद अभी तक विवि ने सीट आवंटन सूची या पत्र जारी नहीं किए हैं।
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न्यायालय के आदेशों पर इसे गुप्त रखा गया है। कमेटी तय करेगी कि प्रदेश के बाहर से पढ़े कौन से मूल हिमाचली स्टेट कोटा की सीट के लिए पात्र होंगे। किस आधार पर सीटें आवंटित की जाएंगी। काउंसलिंग कमेटी में शामिल चेयरमैन चिकित्सक शिक्षा निदेशक, सभी निजी और सरकारी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों के प्राचार्य सदस्य बैठक में हिस्सा लेंगे।
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एमबीबीएस/बीडीएस काउंसलिंग कमेटी के चेयरमैन डीएमई डा. अशोक शर्मा ने बताया कि सोमवार को काउंसलिंग कमेटी की बैठक बुलाई जा रही है। इसमें सीट आवंटन और पात्रता को लेकर दिए गए न्यायालय के फैसले पर अमल करते हुए मेरिट तैयार का सीट आवंटन पर फैसला ले लिया जाएगा।
विवि के परीक्षा नियंत्रक डा. जेएस नेगी का कहना है कि कोर्ट के आदेश और काउंसलिंग कमेटी के फैसले के अनुरूप ही सीट आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी।
इसी बार जोड़ी गई थी पात्रता के लिए एक शर्त- प्रदेश सरकार ने इसी सत्र की प्रवेश प्रक्रिया के लिए जारी प्रोस्पेक्टस में एमबीबीएस में प्रवेश के लिए मूल हिमाचली और बाहर से पड़े छात्रों की पात्रता को लेकर एक शर्त जोड़ी थी, जिसमें प्रदेश के बाहर नौकरी, कारोबार या प्राइवेट काम करने वाले और बाहर से ही अपने बच्चों की पढ़ाई करने वालों को स्टेट कोटा की सीट के लिए अपात्र घोषित किया था।
हालांकि इसमें केंद्र सरकार , सेना या अन्य क्रेंद सरकार के विभागाें में सेवारत और बाहरी राज्यों के सरकारी उपक्रमों में सेवारत कर्मियों के बच्चों को इस नई शर्त से बाहर रखा गया था। इस पर निजी क्षेत्र में काम करने वाले अभिभावक मामला न्यायालय लेकर गए, और इसे उनके साथ अन्याय बताया था।
इस पर न्यायालय ने काउंसलिंग प्रक्रिया को जारी रख सीट आवंटन को गुप्त रखे जाने के आदेश देकर फैसला सुरक्षित रखा था। जिस पर शुक्रवार को उच्च न्यायालय ने एक फैसला दिया है।