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लर्निंग आउटकम चार्ट लगाकर औपचारिकता निभा रहे शिक्षक

Sun, 17 Sep 2017 12:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sun, 17 Sep 2017 12:21 PM IST
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learning outcome chart in himachal government schools

प्रदेश के पहली से लेकर आठवीं कक्षा के सरकारी स्कूलों में लर्निंग आउटकम चार्ट के आधार पर पढ़ाई करवाने की मुहिम सिरे चढ़ती नहीं दिख रही है। कुछ शिक्षक लर्निंग आउटकम चार्ट लगाकर मात्र औपचारिकता निभा रहे हैं। चार्ट पर हाथ से लिखने की जगह शिक्षक इंटरनेट से डाउनलोड प्रिंट चिपका रहे हैं।

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बच्चों को समझाए बिना कई शिक्षक चार्ट को सिर्फ भरने के काम में जुटे हैं। इसके अलावा हिंदी की जगह सिर्फ अंग्रेजी मीडियम के प्रिंट्स से ही चार्ट को भरा जा रहा हैं। सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना कार्यालय ने इस तरह की शिकायतें सामने आने के बाद सभी स्कूल हेडमास्टरों और प्रिंसिपलों को चार्ट को लेकर सख्ती बरतने के आदेश दिए हैं।
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परियोजना निदेशक घनश्याम चंद ने कहा है कि लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एनसीईआरटी के आदेशानुसार शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में लर्निंग आउटकम चार्ट के आधार पर पढ़ाई करवाने का फैसला लिया है। किस कक्षा के छात्र में पढ़ने और समझने की कितनी क्षमता है। इस बात का मूल्यांकन चार्ट से किया जा रहा है।
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चार्ट में स्पष्ट किया गया है कि किस कक्षा में पढ़ने वाले छात्र को विषय से संबंधित कितनी जानकारी होना जरूरी है। सीखने के परिणामों का यह मानकीकरण छात्र की शिक्षा को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद करने के लिए शुरू किया गया है। लेकिन प्रदेश के कुछ स्कूलों में लर्निंग आउटकम चार्ट का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है।

अभिभावक भी रखें चार्ट पर नजर

learning outcome chart in himachal government schools

लर्निंग आउटकम चार्ट के माध्यम से स्कूलों में बच्चों को दी जा रही शिक्षा पर अभिभावक भी सीधी नजर रख सकते हैं। हर विषय और चैप्टर वाइज स्कूल में दी गई शिक्षा की जानकारी चार्ट के माध्यम से हर कक्षा में सार्वजनिक की जाएगी।

अभिभावक स्कूलों में जाकर यह देख सकते हैं कि कक्षा में पढ़ाया गया पाठ उनके बच्चों को कितना समझ में आया है। किस विषय के कितने चैप्टर पढ़ाए गए हैं? इन चैप्टरों के कवर होने के बाद बच्चों को क्या-क्या आना चाहिए?

अभिभावक स्कूलों में चार्ट को देखकर घर पर अपने बच्चों का ज्ञान जांच सकेंगे। अगर बच्चों में अभिभावक कमी पाएंगे तो इसकी जानकारी स्कूल जाकर शिक्षक को देंगे। ऐसे बच्चों पर शिक्षक अधिक ध्यान देंगे। 

चार्ट को दो भागों में बांटा गया है। पहले चार्ट में बताया गया है कि बच्चों को कैसे सीखना है। दूसरे चार्ट में लक्ष्य तय किए गए हैं कि बच्चों को कक्षा और विषय के हिसाब से कितनी जानकारी होना अनिवार्य है।

प्रदेश के 1807 स्कूलों में लगेंगे सीसीटीवी कैमरे

learning outcome chart in himachal government schools

हिमाचल प्रदेश के 1807 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में अब बच्चों पर सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी जाएगी। ब्लू व्हेल मामले और हरियाणा के गुरुग्राम में स्कूल में बच्चे की मौत के बाद सुरक्षा कारणों के चलते उच्च शिक्षा निदेशालय ने सीसीटीवी कैमरे लगाने का फैसला लिया है।

विभाग ने सभी प्रिंसिपलों को आदेश जारी कर विभिन्न स्कीमों के तहत जमा स्टूडेंट फंड से सीसीटीवी खरीदने को कहा है। साथ ही स्कूल परिसर में बाहरी लोगों के प्रवेश पर पूर्ण पाबंदी लगा दी है। निदेशालय ने जिला उपनिदेशकों और प्रधानाचार्यों को यौन शोषण की शिकायतों के निपटारे को स्कूलों में कमेटियां बनाने के भी निर्देश दिए हैं।

इसकी छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को भी जानकारी दी जाए। कमेटियों के समक्ष आने वाले मामलों को गंभीरता से लिया जाए। कमेटियों के समक्ष आई शिकायतों को उच्च अधिकारियों के समक्ष भी रखा जाए।

निदेशालय ने सभी स्कूल परिसरों में चाइल्ड हेल्प लाइन नंबर 1098 और स्थानीय पुलिस थानों के नंबर लिखने के आदेश दिए हैं। स्कूल प्रिंसिपल को जारी आदेश में कहा गया है कि प्रार्थना सभा में बच्चों को मानसिक तौर पर मजबूत किया जाए। बच्चों को नकारात्मक विचारों से दूर रखने के लिए कदम उठाए जाएं।

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