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बिना रिजल्ट निकाले ही शुरू कर दी एलएलएम, एमफिल की काउंसलिंग

Wed, 23 Oct 2019 05:16 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 23 Oct 2019 05:16 PM IST
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HPU Shimla LLM and MPhill Counseling and SFI Protest
- फोटो : अमर उजाला

एचपीयू ने जून में हुईं पीजी डिग्री कोर्स की सेमेस्टर परीक्षाओं का परिणाम घोषित किए बिना ही एलएलएम और एमफिल की काउंसलिंग प्रक्रिया बुधवार से शुरू कर दी है। इसमें हिस्सा लेने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं को गोपनीय परीक्षा परिणाम के लिए आवेदन करने करने को 500 रुपये फीस देनी पड़ रही है।

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विवि का ईआरपी (इंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग) कंप्यूटराइज्ड करने को आठ करोड़ खर्च करने पर भी परीक्षा सिस्टम पटरी से उतरता दिख रहा है। वहीं, गोपनीय परीक्षा परिणाम के लिए पांच सौ फीस और चार माह से लटके परिणाम के खिलाफ एसएफआई ने मोर्चा खोल दिया है। छात्र संगठन ने अव्यवस्था और आम छात्रों की परेशानी को लेकर बुधवार को विवि में धरना-प्रदर्शन और परीक्षा सिस्टम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। 
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\इकाई अध्यक्ष रविंद्र और सचिव गौरव कहा कि चार माह से छात्र परिणाम का इंतजार कर रहे है। बुधवार को विभिन्न विभागों की काउंसलिंग के लिए सैकड़ों छात्र परिणाम के बिना आए। उन्हें पीजी का गोपनीय परिणाम लेने के लिए पांच सौ फीस देने को कहा गया। इस वसूली को तुरंत बंद किया जाए। कहा कि ईआरपी प्रोजेक्ट और रूसा लागू करते हुए विवि ने 45 दिनों में परीक्षा परिणाम घोषित करने के दावे किए थे। एसएफआई ने पीजी परिणाम जल्द घोषित करने और गोपनीय परिणाम देने के नाम पर की जा रही फीस वसूली पर रोक लगाने की मांग की है। 
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बीएड का परिणाम न आने से रुकी काउंसलिंग
सचिव गौरव ने कहा कि एमएड की प्रवेश परीक्षा का परिणाम घोषित हुए तीन-चार माह हो गए हैं, मगर बीएड का परिणाम घोषित न होने से एमएड की काउंसलिंग नहीं हो रही है। परीक्षा पास कर छात्र-छात्राएं काउंसलिंग शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। 


दस बजे लग जाता है पुसतकालय के गेट पर ताला 
एसएफआई ने विवि प्रशासन पर छात्रावासों में रह रहे छात्रों की मांग को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। गौरव ने कहा कि दस बजे छात्रावास के गेट बंद हो जाते हैं, मगर विवि के मुख्य पुस्तकालय में छात्रों के लिए 24 घंटे एक सेक्शन खुला रखा जा रहा है। इसमें छात्रावास में रहने वाले छात्र ही पढ़ने जाते थे।

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