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हजारों विद्यार्थी यूजी कोर्स से वंचित, एक साल बरबाद होना तय

Thu, 20 Dec 2018 01:18 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Thu, 20 Dec 2018 01:18 PM IST
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HPU Shimla ICDEOL did not get affiliation from UGC

अंतरराष्ट्रीय दूरवर्ती शिक्षा अध्ययन केंद्र (इक्डोल) से इस बार हजारों विद्यार्थी यूजी कोर्स करने से वंचित रह जाएंगे। यूजीसी डेब (डिस्टेंस एजूकेशन ब्यूरो) से मान्यता न मिलने के कारण इक्डोल से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों का एक साल बरबाद होना तय है। इनमें कामकाजी महिलाएं, दूरदराज इलाकों के छात्र-छात्राओं के अलावा नौकरीपेशा लोगों सहित छह श्रेणियों के विद्यार्थी शामिल हैं। बीते सत्र में 20 हजार विद्यार्थियों ने इक्डोल में प्रवेश लिया था।  

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उल्लेखनीय है कि प्रदेश में वर्ष 2013 से रूसा के तहत च्वायस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) लागू होने के बाद प्राइवेट यूजी कोर्स पर रोक लग गई थी। इसके बदले विवि ने इक्डोल से छह श्रेणियों के छात्रों को यूजी कोर्स करने का विकल्प दिया था। रूसा सीबीसीएस के तहत यूजी कोर्स या तो रेगुलर किया जा सकता है या फिर दूरवर्ती शिक्षा मोड से।
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चूंकि, इसमें असाइनमेंट और इंटरनल असेसमेंट के आधार पर मूल्यांकन की व्यवस्था रहती है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) और इक्डोल प्रशासन जल्द मान्यता दिलाने का भरोसा दिलाते रहे, लेकिन अभी तक मान्यता नहीं मिल पाई है। ऐसे में इक्डोल से इस बार उक्त श्रेणियों के नए बैच में प्रवेश मिलना मुश्किल है।

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ये लेते थे इक्डोल में प्रवेश

HPU Shimla ICDEOL did not get affiliation from UGC

रूसा सीबीसीएस लागू होने के बाद से यूजी डिग्री कोर्स करने के लिए छह श्रेणी के छात्र-छात्राएं इक्डोल के माध्यम से कोर्स में प्रवेश लेते हैं। इनमें महिलाएं, अनुसूचित जाति, जनजाति से संबंधित छात्र-छात्राएं, सरकारी कर्मचारी, सैनिक व अर्ध सैनिक बल में तैनात जवानों के अलावा सामान्य वर्ग के छात्र और कामकाजी लोग शामिल हैं। 

रूसा सीबीसीएस के तहत बतौर प्राइवेट उम्मीदवार यूजी कोर्स नहीं किया जा सकता। इसके लिए कक्षाएं लगाना अनिवार्य होता है। छह श्रेणी के विद्यार्थी इक्डोल से यूजी कोर्स करना चाहते थे, वे प्रवेश नहीं ले पाए हैं। इसलिए उनकी परीक्षा नहीं हो सकती है। इक्डोल से यूजी कोर्स में नया बैच बैठाने का मामला यूजीसी से उठाया है। मान्यता मिलने के बाद ही इस पर कुछ किया जा सकेगा। - डॉ. जेएस नेगी, परीक्षा नियंत्रक एचपीयू

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