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एचपीयू पीएचडी प्रवेश पीएचडी मामले पर बवाल: एबीवीपी ने किया डीएस का घेराव, एसएफआई ने निकाली रैली

Tue, 26 Oct 2021 06:36 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 26 Oct 2021 06:36 PM IST
सार

एचपीयू शिमला की ओर से पीएचडी में प्रवेश देने को लेकर लिए गए फैसले पर विवाद गहराता जा रहा है। मंगलवार को एबीवीपी ने इस मामले पर अधिष्ठाता अध्ययन का किया घेराव किया। वहीं, एसएफआई ने विवि परिसर में विशाल रैली निकाली और धरना प्रदर्शन किया। इसके साथ ही इकाई ने 24 घंटे की हड़ताल भी शुरू कर दी। 

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HPU PhD admission case: ABVP protested against DS, SFI strike, demanded to withdraw the decision
एचपीयू में एबीवीपी व एसएफआई ने किया प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय(एचपीयू) शिमला की ओर से पीएचडी में प्रवेश देने को लेकर लिए गए फैसले पर विवाद गहराता जा रहा है। छात्र संगठन लगातार इस मामले पर विरोध जता रहे हैं। मंगलवार को एबीवीपी ने इस मामले पर अधिष्ठाता अध्ययन का किया घेराव किया। इकाई सचिव आकाश नेगी ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिना किसी प्रवेश परीक्षा और नेट-जेआरएफ के पीएचडी में विवि कर्मचारियों के बच्चों को दाखिला देने का जो फैसला लिया है, उसे तुरंत वापस लिया जाए। यह यूजीसी के नियमों के खिलाफ है। इसमें आम विद्यार्थियों के साथ धोखा किया गया है। इस फैसले से विश्वविद्यालय की साख भी खराब हुई है। प्रशासन ने अपने चहेतों को प्रवेश देने के लिए विभागों में सीटों को 2 से 10 तक कर दिया। प्रशासन नियमों को ताक पर रखकर अपनी सहूलियत के अनुसार फैसले ले रहा है। कई विभागों में सीटें खाली होने पर भी नहीं भरी जा रही हैं। इकाई ने इन खाली सीटों को तुरंत भरने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी पीएचडी में प्रवेश लेना चाहते हैं लेकिन प्रशासन की ओर से इनकी काउंसलिंग के लिए अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। पीएचडी दाखिलों में रिजर्वेशन रोस्टर को लागू किया जाए। डीएस ने आश्वासन दिया कि मामले पर प्रशासन के समक्ष बात की जाएगी।

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पीएचडी मामले पर बवाल, प्रदर्शन के बाद एसएफआई की हड़ताल 
वहीं, एसएफआई ने विवि परिसर में विशाल रैली निकाली और धरना प्रदर्शन किया। इसके साथ ही इकाई ने 24 घंटे की हड़ताल भी शुरू कर दी। यह हड़ताल बुधवार शाम तक चलेगी। 30 से अधिक कार्यकर्ता विवि परिसर में पिंक पेटल के समीप हड़ताल पर बैठ गए हैं। इससे पहले धरने को संबोधित करते हुए विवि कैंपस अध्यक्ष विवेक राज ने कहा कि हाल ही में पीएचडी भर्ती अध्यादेश और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों की अवहेलना है। विवि प्रशासन अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए इस तरह की धांधलियां कर रहा है। कार्यकारी परिषद में तय किया गया कि हाल ही में जिन प्रोफेसर की भर्तियां हुई हैं और जिन अध्यापकों की पीएचडी पूरी नहीं हुई है, वो अध्यापक अपनी पीएचडी में एडमिशन बिना किसी एंट्रेंस एग्जाम के ले सकते हैं। कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदेश सरकार अपने चहेतों की भर्तियां पीएचडी के अंदर करवाना चाहते हैं और इस विश्वविद्यालय को एक विशेष विचारधारा का अड्डा बनाना चाहते हैं। अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि वीसी ने कहीं न कहीं अपने बेटे का पीएचडी में फर्जी दाखिला प्रदेश सरकार की शय से करवाया है। कहा कि विवि में दीनदयाल उपाध्याय नाम से एक पीठ का गठन किया गया है और इसमें डिप्लोमा कोर्स शुरू किया गया है । इसकी अपनी कोई मास्टर डिग्री नहीं है लेकिन विवि प्रशासन ने अयोग्य लोगों को इस विश्वविद्यालय में भर्ती करने के लिए इस पीठ में पीएचडी का प्रावधान किया। सवाल यह है कि जिस पीठ की मास्टर डिग्री ही नहीं है, वह पीएचडी कैसे करवा रही है।
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निजी यूनिवर्सिटी से एचपीयू में माइग्रेट हो रहे पीएचडी छात्र
इकाई का कहना है कि विवि में पिछले कुछ समय से निजी शिक्षण संस्थानों से छात्रों की माइग्रेशन हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अंदर की जा रही है। यह सरासर विश्वविद्यालय के अध्यादेश का उल्लंघन है। विश्वविद्यालय में पीएचडी में दाखिला लेने के लिए प्रवेश परीक्षा और नेट जेआरएफ पास करना पड़ता है। वहीं, दूसरी ओर निजी संस्थानों के अंदर सिर्फ पैसे के बलबूते पीएचडी में दाखिला दिया जाता है। ये फैसले वापस लिए जाने चाहिए।

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