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HPU: ईसी ने शिक्षक भर्ती और पीएचडी पर लिया बड़ा फैसला

Sat, 09 Jul 2016 12:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 09 Jul 2016 12:41 PM IST
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HPU EC decisions on assistant professors recruitment.

प्रदेश विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की वीरवार को कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी की अध्यक्षता में विशेष बैठक बुलाई गई। इसमें कार्यकारी परिषद ने शिक्षक भर्ती की पात्रता को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के रेगुलेशन 2010 के तृतीय संशोधन की 4 मई 2016 को जारी अधिसूचना को विश्वविद्यालय में लागू किए जाने का फैसला लिया है।

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सहायक आचार्य भर्ती में विश्वविद्यालय अब इन्हीं नियमों को लागू करेगा। कार्यकारिणी परिषद की बैठक में 2009 से पीएचडी डिग्री उम्मीदवारों को जारी अस्थायी प्रमाण पत्रों के विषय में उच्च न्यायालय के पी. सुशीला मामले में 16 मार्च 2015 को दिए फैसले को लागू करने का निर्णय लिया गया।
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उक्त अस्थायी प्रमाण पत्रों की वैधता के अध्ययन के लिए प्रति कुलपति प्रो. राजेंद्र सिंह चौहान की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी गठन का निर्णय भी लिया गया है। कमेटी इसमें कानूनी पहलुओं का भी बारीकी से अध्ययन करेगी।
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यह उच्च स्तरीय कमेटी जो रिपोर्ट देगी उसी पर निर्भर करेगा कि पूर्व में 2009 से पहले पीएचडी डिग्री धारकों को जारी किए प्रमाण पत्र वाले उम्मीदवार सहायक आचार्य पद के पीएचडी को नेट/स्लेट /सेट से मिलने वाली छूट के लिए पात्र हैं या नहीं।

बैठक में कुलपति ने वर्ष 2013-14 के वार्षिक प्रतिवेदन को भी स्वीकृति प्रदान की। बैठक में शिक्षक भर्ती को लेकर के नियमों और पात्रता शर्तों और यूजीसी की नई जारी अधिसूचना को अपनाए जाने और शिक्षक भर्ती की अधर में लटकी प्रक्रिया को आगे बढ़ाए जाने पर विस्तार से चरचा की गई।

ये हैं यूजीसी में पीएचडी के लिए नई शर्तें

HPU EC decisions on assistant professors recruitment.

एचपीयू ने सहायक आचार्य पद की भर्ती में दी छूट यूजीसी विनियम  2010 के तृतीय संशोधन की भारत राजपत्र में जारी अधिसूचना को विवि पूरी तरह से लागू करने का फैसला हुआ है। इस संशोधन के मुताबिक सहायक आचार्य पद पर भर्ती में नेट/स्लेट /सेट से छूट लेने के लिए पीएचडी तय मानकों के मुताबिक की होनी जरूरी होगी।

नई शर्तों (क) पीएचडी को अभ्यर्थी को केवल नियमित पद्धति से पीएचडी उपाधी प्रदान की गई हो। (ख) दो बाह्य परीक्षकों द्वारा शोध प्रबंध का मूल्यांकन किया हो। (ग) अभ्यर्थी ने अपने पीएचडी शोध कार्य में से दो शोध पत्र प्रकाशित किए हों, जिसमें से कम से कम एक पत्र संदर्भित (रैफरिड) जर्नल में प्रकाशित हुआ हो।

(घ) अभ्यर्थी ने अपने पीएचडी योध्या प्रबंध कार्य में से दो पेपर संगोष्ठियो/सम्मेलनों में प्रस्तुत किए हों।(ड.) अभ्यर्थी का मौखिक साक्षात्कार  संचालित किया गया हो। ये समस्त लिखित शर्तें क से ड को कुलपति/सम कुलपति/ संकाय अध्यक्ष शैक्षणिक कार्य /संकाय अध्यक्ष (विश्वविद्यालय शिक्षण की ओर से प्रमाणित किया जाना चाहिए।

ईसी के फैसले से प्रभावित हो सकती है शिक्षक भर्ती प्रक्रिया

HPU EC decisions on assistant professors recruitment.

एचपीयू के यूजीसी के नए यूजीसी विनियम 2010 के तृतीय संशोधन में पीएचडी को तय नई शर्तों के लागू होने और 2009 से पहले के पीएचडी धारकों को 2012 से पूर्व जारी किए गए अस्थाई प्रमाण पत्रों की वैद्यता के मुद्दे पर उच्च स्तरीय कमेटी गठन के ईसी के फैसले से विवि की पिछले दो साल से चल रही सहायक आचार्य भर्ती प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।

यदि पीएचडी के दिए गए प्रमाण पत्र वैद्य न हुए तो, तो सहायक आचार्य पद के लिए साक्षात्कार दे चुके उम्मीदवार भी बाहर हो सकते हैं। यूजीसी के विनियम 2010 के तृतीय संशोधन में साफ शब्दों में लिखा गया है कि 11 जुलाई 2009 से पहले एमफिल/पीएचडी को पंजीकृत और डिग्री धारकों को पात्रता शर्त में नेट/स्लेट /सेट की छूट के लिए नए तय नियमों के तहत शर्तों पर खरा उतरना होगा।

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