बोर्ड अधिसूचना की गफलत ने शिक्षकों के हाथ-पांव फुलाए
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स्कूल शिक्षा बोर्ड की एक अधिसूचना की गफलत ने प्राइमरी और मिडल स्कूलों के मुखियाओं के हाथ-पांव फुला दिए। अधिसूचना में विषय और कक्षावार बच्चों की संख्या उपलब्ध कराने समेत प्रति विद्यार्थी प्रश्न पत्र फीस देने का जिक्र है। इसमें 5वीं कक्षा के विद्यार्थियों से 50 रुपये, जबकि 8वीं के विद्यार्थियों से 100 रुपये शुल्क लेने का जिक्र किया गया है।
शिक्षा का अधिकार कानून के तहत सरकारी स्कूलों में बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। ऐसे में प्रति विद्यार्थी शुल्क की बात से स्कूल मुखियाओं में हड़कंप मच गया, लेकिन बोर्ड ने सफाई दी है कि सरकारी स्कूल के बच्चों से शुल्क नहीं वसूला जाएगा।
ऐसे हुआ असमंजस
बोर्ड के सचिव डॉ. हरीश गज्जू ने कहा कि 5वीं और 8वीं की वार्षिक परीक्षा के लिए सरकारी और प्राइवेट स्कूलों को शिक्षा बोर्ड प्रश्नपत्र मुहैया करवाएगा। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों से यह फीस नहीं ली जाएगी, जबकि निजी स्कूलों को यह फीस देनी होगी। अधिसूचना को समझने में कुछ स्कूल मुखियाओं को गलती लगी है।
स्कूल शिक्षा बोर्ड की 4 दिसंबर 2018 को जारी अधिसूचना में पहले पैराग्राफ में सरकारी और निजी स्कूलों को 5वीं और 8वीं की वार्षिक परीक्षा में प्रश्नपत्र मुहैया करवाने की बात कही गई है। इसमें स्कूलों को इसके लिए बच्चों की संख्या भेजने का भी जिक्र किया गया है।
निजी स्कूलों से संख्या के साथ 5वीं से 50 और आठवीं से 100 रुपये प्रति बच्चा शुल्क देने के भी निर्देश दिए गए हैं। सरकारी स्कूलों को केवल बच्चों की संख्या ही भेजनी होगी।