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तोड़ने वाला नहीं, जोड़ने वाला दलित साहित्य पढ़ाया जाए, पीएम को भेजा ज्ञापन

Tue, 16 Jan 2018 09:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला
अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला Updated Tue, 16 Jan 2018 09:54 AM IST
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hp congress kisan cell submit memorandam in racism issue

कांग्रेस किसान सेल ने मांग उठाई है कि कालेज पाठ्यक्रम में तोड़ने वाला नहीं, जोड़ने वाला साहित्य पढ़ाया जाए। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के तहत महाविद्यालयों में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत अंग्रेजी के छठे सेमेस्टर में क्रांतिकारी एवं साहित्यकार स्वर्गीय ओम प्रकाश बाल्मीकि की पढ़ाई

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जा रही आत्मकथा जूठन को पाठ्यक्रम से हटाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग उठाई गई है। सोमवार को कांग्रेस किसान सेल के प्रदेश महासचिव संजय शर्मा सहित आधा दर्जन संस्थाओं ने उपायुक्त कांगड़ा संदीप कुमार के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजा। इसमें कई दलित समुदाय से संबंधित संस्थाओं के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। 

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विभिन्न संस्‍थाओं के प्रतिनिधि भी रहे मौजूद

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संजय शर्मा, आवाम संस्था के चेयरमैन जग्गू नौरिया, उपाध्यक्ष प्रीतम, सचिव सुरेंद्र, ग्लोबल के चेयरमैन कमल राणा, हार्म संस्था के चेयरमैन संजय जंबाल, उदय संस्था के चेयरमैन जोगिंद्र राणा, बेटी संस्था के उमेश कटोच, राजपूत सभा के सदस्य शशिपाल भंगालिया, श्रीकंठ सहित शिवा महिला मंडल पालमपुर की पूनम

बाली, सुनीता, रेश्मा, लता, सुरिंद्रा, गरीब, पुष्पा, राधा, निर्मला, चंद्रमणी और सुमन ने कहा कि जूठन स्वर्गीय ओमप्रकाश बाल्मीकि के व्यक्तिगत अनुभवों का संग्रह है। इसमें छुआछूत पर लेखक के अनुभवों को बताया गया है, जबकि कई प्रतिबंधित जातिसूचक शब्दों का प्रयोग है।

वर्तमान में देश में ऐसा कुछ नहीं है। ऐसे में कॉलेज के विद्यार्थियों को जूठन पढ़ाए जाने से बच्चों के बीच मतभेद पैदा हो रहा है। साथ ही एक-दूसरे के प्रति जातिगत आधार पर द्वेष की भावना भी पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि वे पुस्तक जूठन का कतई विरोध नहीं करते हैं।

न ही महाविद्यालयों में दलित साहित्य पढ़ाने का विरोध करते हैं, लेकिन महाविद्यालयों में पढ़ाया जाने वाले दलित साहित्य की समीक्षा हो। महाविद्यालय में ऐसा दलित साहित्य नहीं पढ़ाया जाना चाहिए, जिससे कि देश की एकता और अखंडता पर असर पड़े। बल्कि ऐसा दलित साहित्य पढ़ाया जाए, जिससे कि देश के युवाओं को एकजुटता में पिरोने का संदेश हो।

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