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आचार संहिता लागू होने से लटक गईं ये डेढ़ हजार भर्तियां
ब्यूरो/अमर उजाला, हमीरपुर/शिमला
Updated Fri, 13 Oct 2017 01:25 PM IST
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विधानसभा चुनावों को लेकर प्रदेश में आचार संहिता के लागू होते ही प्रदेश भर में हजारों की संख्या में नई भर्तियों पर रोक लग गई है। अकेले कर्मचारी चयन आयोग में ही करीब डेढ़ हजार पदों का अंतिम परीक्षा परिणाम घोषित करने पर पाबंदी लग गई है।
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इसके अलावा तीन हजार पदों पर आयोग को नई भर्तियां करनी हैं, जिसके लिए आयोग ने 15 सितंबर से आवेदन आमंत्रित किए हैं। हालांकि आचार संहिता के दौरान भी आयोग विभिन्न पदों के लिए लिखित परीक्षाएं और स्किल टेस्ट का आयोजन कर सकता है। लेकिन अंतिम भर्ती परीक्षा परिणाम आचार संहिता के खत्म होने के बाद ही जारी होगा।
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इस बीच लिखित परीक्षा के दौरान आयोग को सबसे बड़ी दिक्कत परीक्षा केंद्र के आने वाली है। चूंकि प्रदेश में 9 नवंबर को विधानसभा चुनाव हैं और प्रदेश भर के स्कूलों में स्थापित मतदान केंद्रों पर इस दिन मतदान भी होना है।
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हालांकि नियमों के अनुसार एक हजार से कम आवेदन आने पर कर्मचारी चयन आयोग अपने कार्यालय या किसी अन्य जगह एक परीक्षा केंद्र स्थापित कर परीक्षा ले सकता है। लेकिन एक हजार से अधिक आवेदन आने पर एक से अधिक परीक्षा केंद्रों की आवश्यकता रहती है।
जिसके चलते कुछेक पोस्ट कोर्ड की भर्तियों की लिखित परीक्षा भी प्रभावित हो सकती है। उधर, हिप्र कर्मचारी चयन आयोग के सचिव डॉ. जितेंद्र कंवर ने कहा कि आचार संहिता का आयोग की भर्तियों पर खासा फर्क नहीं पडने वाला।
लिखित और टाइपिंग टेस्ट चलते रहेंगे। केवल अंतिम परीक्षा परिणाम नहीं निकाल सकते। उन्होंने कहा कि पूर्व में विज्ञाप्ति पदों में से महज सात पोस्ट कोड का रिजल्ट शेष बचा है, जिसे अब घोषित करने के लिए स्पेशल मंजूरी लेनी पड़ेगी।
इन सात पोस्ट के रिजल्ट आचार संहिता में फंसे
आईपीएच विभाग में पंप ऑपरेटर, लैब असिस्टेंट, सीनियर लैब टेक्नीशियन, पर्यवेक्षक एलडीआर, भाषा अध्यापक, शारीरिक शिक्षक, आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट और जूनियर ऑफिसर असिस्टेंट (आईटी) का फाइनल रिजल्ट आचार संहिता के कारण लटक गया है। इन सात पोस्ट में करीब डेढ़ हजार पदों पर भर्तियां होनी हैं।
31 अक्तूबर तक बढ़ाई आवेदन की तारीख
चयन आयोग हमीरपुर ने 69 विभिन्न पोस्ट कोड के तहत करीब तीन हजार पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की तारीख बढ़ा दी है। पहले आवेदन की अंतिम तारीख 15 अक्तूबर निर्धारित थी, जिसे अब बढ़ाकर 31 अक्तूबर कर दिया है।
आयोग के सचिव डा. जितेंद्र कंवर ने कहा कि ऑनलाइन आवेदन और ऑनलाइन परीक्षा शुल्क जमा करवाने में आ रही तकनीकी परेशानियों के चलते आयोग ने आवेदन की तारीख को बढ़ा दिया है। अब इच्छुक आवेदनकर्ता 31 अक्तूबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
एचपीयू में लटक गई शिक्षकों के 194 पदों की भर्ती
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय पर भी भारी पड़ गई। विवि के अपने संस्थानों के लिए 194 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया लटक गई है। वहीं विवि के लिए नए स्थायी कुलपति की नियुक्ति का मामला भी अब नई सरकार के सत्तासीन होने तक लटक गया है।
विवि के स्तर पर शिक्षकों की भर्ती को पुनर्विज्ञापित किए गए पदों के बाद फार्म छंटनी तक तो प्रक्रिया बढ़ी, मगर साक्षात्कार के लिए पैनल तय न होने के कारण साक्षात्कार की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। इसके चलते विभागों में तमाम पद खाली ही रह गए। इसके चलते अब विवि को गेस्ट फैकल्टी से ही काम चलाऊ व्यवस्था करनी पड़ी।
यही नहीं, मई माह में रिक्त हो चुके कुलपति के पद पर नई नियुक्ति का मामला लटका ही रह गया। अब यह नियुक्ति भी नई सरकार के बन जाने के बाद ही संभव हो पाएगी। प्रदेश सरकार के स्तर पर वीसी के पद पर स्थायी नियुक्ति को सर्च कमेटी जरूर बनी, मगर बात उससे आगे न बढ़ी और कोई नाम फाइनल नहीं हो पाया।
ऐसे में 24 मई को कुलपति के पद के रिक्त होने पर प्रति कुलपति को ही नई नियुक्ति होने पद का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया। विवि का नया मुखिया कौन होगा, शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी, यह अब नई सरकार के आने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।
आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो जाने से विवि कार्यकारी परिषद की बैठक में चतुर्थ श्रेणी और निचले स्तर के कर्मचारियों के कुछ पदों को भरने को मंजूरी मिली थी, मगर आगे नहीं बढ़ी। वहीं निवर्तमान सरकार के कार्यकाल में घणाहट्टी में अलग कैंपस
विकसित करने की घोषणाएं हुईं, मगर प्रक्रिया थमी रही, सेटेलाइट कैंपस विकसित करने, विवि को ईआरपी एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग के तहत लाकर पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड और आनलाइन किए जाने की प्रक्रिया भी अधर में ही रह गई है। इसे मार्च 2018 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था। ये तमाम लटके काम अब नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद ही आगे बढ़ पाएंगे।