छात्रों से धोखाधड़ी करने वाले निजी शिक्षण संस्थानों पर गिरने वाली है गाज
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हिमाचल में निजी शिक्षण संस्थानों की जांच शुरू हो गई है। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार सरकार ने उच्च शिक्षा निदेशालय के अफसरों की कमेटी गठित की है। बुधवार को कमेटी ने राजधानी शिमला के प्रतिष्ठित सेंट बीड्ज कॉलेज और भट्ठाकुफर स्थित बीएड कॉलेज का निरीक्षण किया।
इस दौरान कॉलेजों की फीस, छात्रवृत्ति, मान्यता, स्टाफ, स्टूडेंट्स एनरोलमेंट सहित आधारभूत ढांचे की जांच की गई। संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा डा. बीएल बिंटा की अगुवाई में कमेटी ने जांच की गई। डा. बीएल बिंटा ने बताया कि कॉलेजों से जुटाए गए रिकार्ड की जानकारी हाईकोर्ट को सौंपी जाएगी। आने वाले दिनों में प्रदेश के अन्य कॉलेजों का भी निरीक्षण किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी निजी शिक्षण संस्थानों में मूलभूत सुविधाओं और मान्यता संबंधी जांच के लिए एक कमेटी का गठन करने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिए हैं कि वे कमेटी का गठन करे, जो हर स्तर के निजी शिक्षण संस्थान जैसे स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर, किसी भी नाम से चलने वाले एक्सटेंशन सेंटर और विश्वविद्यालय की जांच पूरी करे।
कम से कम 11 जानकारियां डालनी होंगी वेबसाइट में
कोर्ट ने इन आदेशों के अलावा अतिरिक्त मुख्य सचिव को निर्देश जारी किए हैं कि वे निजी संस्थानों से जुड़ी कम से कम 11 जानकारियां अपनी वेबसाइट और संस्थान के मुख्य द्वार पर लगाएं। संस्थान में फेकल्टी सदस्यों की योग्यता, काम का अनुभव,
आधारभूत ढांचे का ब्योरा, फीस का संपूर्ण विवरण, अध्यापक-अभिभावक संघ के बारे में जानकारी, परिवहन सुविधाओं की विस्तार से जानकारी, संस्थान की आयु, उपलब्धियां, छात्रवृत्तियों की जानकारी, पूर्व विद्यार्थियों के पते, फोन नंबर आदि को इन जानकारियों में शामिल करने को कहा है। कोर्ट ने कहा है कि अगर इन आदेशों की अवहेलना की जाती है तो अवमानना का मामला चलाया जाएगा।
ये हैं जांच के मुख्य पहलु- क्या निजी संस्थान के पास पर्याप्त आधारभूत ढांचा, प्रशिक्षित स्टाफ और अध्यापक हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि क्या सभी निजी शिक्षण संस्थान सरकार की ओर से अधिकृत फीस से अधिक वसूल कर रहे हैं या नहीं। इस कमेटी का यह भी दायित्व होगा कि वह रिपोर्ट में स्पष्ट करे कि क्या कोई विश्वविद्यालय, डीम्ड विश्वविद्यालय या अन्य संस्थान ओपन
डिस्टेंस लर्निंग के माध्यम से कोई प्रोग्राम या कोर्स तो नहीं करवा रहे हैं, जो यूजीसी के नियमों के विपरीत हो। कोर्ट ने कमेटी को कहा है कि वह बताए कि क्या कोई गुमराह करने वाले विज्ञापन ऐसे निजी संस्थाओं की ओर से जारी किए जा रहे हैं।