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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Dispute over Junior Office Assistant Result.

जूनियर ऑफिस असिस्टेंट परीक्षा परिणाम पर उठे सवाल

Fri, 21 Jul 2017 12:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नाहन (सिरमौर)
ब्यूरो/अमर उजाला, नाहन (सिरमौर) Updated Fri, 21 Jul 2017 12:53 PM IST
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Dispute over Junior Office Assistant Result.

एचपीयू की ओर से घोषित जूनियर ऑफिस असिस्टेंट के विभिन्न वर्गों के 53 पदों का लिखित परीक्षा परिणाम सवालों के घेरे में आ गया है। युवाओं ने परिणाम पर सवाल उठाए हैं। इनका कहना है कि विवि ने एक साल का डिप्लोमा भी मांगा था।

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इसकी अधिसूचना 8 फरवरी, 2017 को जारी की थी। इसमें यह स्पष्ट नहीं किया था कि टेस्ट को वही अभ्यर्थी योग्य होंगे, जिन्होंने सरकारी संस्थानों से डिप्लोमा हासिल किया है।
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कहा कि परीक्षा परिणाम निकलने के बाद विवि ने ऐसे हजारों अभ्यर्थियों को अयोग्य करार दिया है,  जिन्होंने प्राइवेट संस्थानों से डिप्लोमा किया है। कहा कि विवि को परीक्षा लेने से पहले ही अभ्यर्थियों को अयोग्य करार देना चाहिए था। अभ्यर्थियों को रोलनंबर ही जारी नहीं करने चाहिए थे। 
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परीक्षा केंद्र शिमला में होने के कारण प्रदेश भर से अभ्यर्थी हजारों रुपये खर्च कर परीक्षा देने आए थे। युवाओं में शुभम, जितेंद्र, मेघा, नितेश, इरकान, रजत, लक्की, सुरभी और विवेक ने इस बाबत एक पत्र मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को भी भेजा है। इसमें उन्होंने प्रदेश में खुले प्राइवेट संस्थानों को अविलंब बंद करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि सरकार की मंजूरी से प्रदेश में हजारों प्राइवेट संस्थान खुले हैं। इनमें लाखों युवा डिप्लोमा कर रहे हैं। यदि उन्हें किसी भी टेस्ट के लिए मान्यता नहीं दी जाती है तो उन्हें अनुमति देने का कोई लाभ नहीं। कहा कि कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर ने भी कई तरह की परीक्षाएं घोषित की हैं।

उनमें भी प्राइवेट संस्थानों का डिप्लोमा मान्य होगा या नहीं। इस पर मुख्यमंत्री सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी करें कि वह अपनी अधिसूचना में इस बात को स्पष्ट करें।  उधर, एचपीयू के रजिस्ट्रार पंकज ललित ने कहा कि सरकार के आरएंडपी रूल्स के आधार पर ही भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई है।


सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त संस्थानों की सूची के आधार पर ही डिप्लोमा को ही कंसीडर किया गया है। विवि ने पद विज्ञापित करते समय इससे संबंधित सभी शर्तें साफ कर दी थीं। 
 

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