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नौकरियों में मेरिट का ध्यान रखें, दूरदराज के उम्मीदवारों को भी दें मौका: सीएम

Tue, 11 Apr 2017 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Tue, 11 Apr 2017 12:03 AM IST
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cm virbhadra singh attended HPPSC programme

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि नौकरियों में सभी क्षेत्रों का निष्पक्ष प्रतिनिधित्व होना चाहिए। चाहे चीन या तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्र हों या अन्य दूरवर्ती क्षेत्र हों। आयोग को सभी अभ्यर्थियों का समान रूप से ध्यान रखना चाहिए। नियुक्तियों में योग्यता को दरकिनार नहीं किया जा सकता है। 

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निष्पक्षता, अखंडता, कठिन परिश्रम और पारदर्शिता किसी भी चयन प्रक्रिया की विशेषताएं होनी चाहिए। शिक्षा में असमानता के चलते राज्य के दूरदराज क्षेत्रों के अभ्यर्थियों को ध्यान में रखते हुए राज्य लोक सेवा आयोग को इन्हें भी मौका देना चाहिए, लेकिन मेरिट से समझौता भी नहीं किया जा सकता है। 
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सोमवार को राज्य लोक सेवा आयोग (एचपीपीएससी) में ‘आईसीटी सॉल्यूशन’ नामक ई-गवर्नेंस परियोजना शुरू करने के बाद कहा कि विभिन्न पदों के चयन में राज्य के सभी क्षेत्रों का समांतर प्रतिनिधित्व होना चाहिए। सीएम वीरभद्र सिंह ने आगे कहा कि उनका मानना है कि ई-गवर्नेंस परियोजना के सफल कार्यान्वयन से भारत के सभी राज्य लोक सेवा आयोगों में भी इसे अपनाया जाएगा।
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इसका श्रेय हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग को जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि एचपीपीएससी ने चयन प्रक्रिया में अनेक सुधार किए हैं, जिससे नियुक्तियों में पारदर्शिता और विश्वसनीयता तय होगी। इस अवसर पर पंजाब लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल एनएस हीरा, उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष प्रो. एनएस बिष्ट, मुख्य सचिव वीसी फारका, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष मोहन झारटा, एचपीपीएससी के पूर्व अध्यक्ष आरआर वर्मा और सदस्य भी अन्य गणमान्य व्यक्तियों सहित उपस्थित थे।

सीएम ने प्रशासनिक दक्षता से आयोग अध्यक्ष पद की गरिमा को ऊंचा किया: तोमर 
आयोग के अध्यक्ष केएस तोमर ने कहा है कि  राज्य लोक सेवा आयोग अपना काम पारदर्शिता से कर रहा है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की प्रशासनिक दक्षता और दूरदर्शिता से आयोग में अध्यक्ष के पद की गरिमा को अधिक ऊंचा किया है। अध्यक्ष को मुख्य सचिव के समतुल्य किया। 


सदस्यों के पदों को प्रधान सचिव के बराबर दर्जा दिया गया। उन्होंने हिमाचल के लोगों की आकांक्षाओं पर खरा उतरने का भरपूर प्रयास किया है। राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्षों की स्थायी समिति में उन्हें निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया है। इसके बाद उन्होंने कई दशकों से लंबित मामलों को पुरजोर तरीके से विभिन्न स्तरों पर उठाया।

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