कॉलेज छात्रों को बड़ा झटका, रूसा के खराब रिजल्ट पर आई रिपोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल के कॉलेजों में रूसा फर्स्ट सेमेस्टर के खराब परीक्षा परिणाम को लेकर गठित एचपीयू की अपनी ही उच्च स्तरीय जांच समिति ने प्रदेश विवि को क्लीन चिट दे दी है। कमेटी ने पूरे रिकॉर्ड की जांच करने के बाद यह दावा किया है कि खराब परिणाम आने पर विवि की कोई गलती नहीं है।
जांच कमेटी ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट वीसी को सौंप दी है। इसमें किसी तरह की कोई खामी नहीं निकली है। कमेटी ने परिणाम तैयार करने, अवार्ड एंट्री, मूल्यांकन आदि हर प्रक्रिया का रिकॉर्ड खंगाला। दो बार कमेटी की बैठकों में पहली बार कॉलेज से एंटर अवार्ड और विवि में इंटरनल असेसमेंट, टर्म एंड परीक्षा अवार्ड की एंट्री और रिजल्ट कंपाइल करने तक की प्रक्रिया जांची।
इसमें इस्तेमाल सॉफ्टवेयर भी जांचा गया, मगर इसमें ऐसी कोई खामी नहीं पाई गई। ऐसे में हजारों छात्रों के पास दोबारा परीक्षा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह गया है। विवि आज इस मामले में कोई बड़ा फैसला ले सकता है।
कमेटी ने कहा रिजल्ट में नहीं कोई गलती
कमेटी अध्यक्ष डीनसीडीसी प्रो. एसएस चौहान ने परीक्षा परिणाम में किसी भी तरह की खामियों की जांच को पूरा कर इसके एक-एक तथ्य को रिपोर्ट में शामिल किया है। कमेटी में कॉलेज प्राध्यापक संघ के अध्यक्ष डॉ. रामलाल शर्मा, कोटशेरा के प्राचार्य डॉ. आरआर चौहान, परीक्षा नियंत्रक डॉ. जेएस नेगी सहित कंप्यूटर विशेषज्ञ डॉ. मुकेश कुमार शामिल थे।
उप कुलसचिव नंद लाल वर्मा इसमें सदस्य सचिव थे। शुक्रवार को कुलपति की घोषणा के बाद आधिकारिक रूप से कमेटी की अधिसूचना कुलसचिव डॉ. पंकज ललित ने की थी। उधर, वीसी एडीएन वाजपेयी ने कहा कि कमेटी की रिपोर्ट मिल गई है।
जल्द इस पर फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट सरकार को भी भेजी जाएगी। उधर, सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने भी इस मामले पर कड़ा संज्ञान लिया है और एचपीयू से रिपोर्ट तलब की है। कुलपति आज यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप सकते हैं।
शनिवार को विवि में शहर के कॉलेजों से शिक्षकों को बुलाकर अधिक छात्रों के विशेष विषय में फेल होने के मामले में उत्तर पुस्तिकाओं का जांचने का कार्य किया। इसमें भी कोई बड़ी खामी नहीं मिली। जांच प्रक्रिया पूरी करने के बाद कमेटी ने रिपोर्ट कुलपति को सौंप दी है। कुलपति और परीक्षा नियंत्रक इस पर क्या फैसला देंगे। इसका इंतजार है।
छात्रों की बढ़ी मुश्किल, कैसे करेंगे 45 फीसदी की शर्त पूरी
यूजी बैच के पहले सेमेस्टर के खराब परिणाम में जो छात्र सेमेस्टर अंत परीक्षा, इंटरनल असेसमेंट में फेल हैं, उनकी मुश्किल बढ़ गई है। सेमेस्टर अंत की परीक्षा छात्र अक्तूबर में होने वाली परीक्षा में दे सकेंगे, मगर इंटरनल असेसमेंट के लिए ऐसा कोई विकल्प नहीं है।
इसमें नए अनुपात के मुताबिक 30 अंकों में पांच नंबर हाजिरी, 15 नंबर हाउस टेस्ट, दस अंक प्रोजेक्ट एंड प्रेजेंटेशन और अन्य गतिविधियों के कॉलेज शिक्षक देते हैं।
बदली गई न्यूनतम अंक की शर्त पड़ी छात्रों पर भारी
जांच कमेटी ने रिपोर्ट में खराब नतीजे के लिए ऑर्डिनेंस में बदलाव कर थ्योरी और इंटरनल असेसमेंट के अनुपात को 50:50 से बदल कर 70:30 करना और उसमें दोनों में न्यूनतम 45 फीसदी अंक अर्जित करने की नई शर्त कारण बताई है।
4 सितंबर, 2015 को जारी अधिसूचना के बाद छात्रों को कॉलेज स्तर पर जागरूक नहीं किया गया। छात्र अभी भी कुल 45 फीसदी अंक की शर्त को मानकर परीक्षा में बैठे। यही खराब परिणाम का नतीजा रहा।