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प्रदेश में मनमाफिक फीस वसूल रहे निजी स्कूल, नियम कायदे नदारद

Tue, 28 Nov 2017 10:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 28 Nov 2017 10:12 AM IST
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charging of fees in arbitrary manner by private school in Himachal

हिमाचल में निजी स्कूलों की फीस निर्धारित करने के लिए आज तक कोई भी प्रावधान नहीं किया गया है। सत्ता किसी भी दल के पास रही हो, निजी स्कूलों के आगे सब नतमस्तक ही रहे हैं। शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों की फीस तय करने के लिए किसी भी तरह की नियमावली नहीं बनाई है।

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हर साल फीस बढ़ने पर कुछ स्कूलों में अभिभावक जरूर हल्ला करते हैं लेकिन स्कूलों के खिलाफ लिखित में शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं।

यही वजह है कि निजी स्कूल अपने मन मुताबिक फीस में बढ़ोतरी करते हैं। हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान अधिनियम 1997 को लेकर उच्च और प्रारंभिक शिक्षा निदेशालयों ने अभी तक कोई भी पुख्ता नीति तैयार नहीं की है।
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निजी स्कूलों से निदेशालय फीस स्ट्रक्चर के बारे में जानकारी तक नहीं लेता। उच्च शिक्षण संस्थानों पर तो राज्य निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग ने काफी हद तक लगाम कसी है। लेकिन निजी स्कूलों को लेकर सरकार और अफसरशाही उदासीन हैं।
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बीते पांच साल के दौरान शिक्षा महकमे के किसी भी अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव और निदेशक ने इस संदर्भ में कोई भी कार्रवाई नहीं की है। जिसके परिणामस्वरूप निजी स्कूलों में हर साल फीस को बढ़ाया जा रहा है।

हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से जगी उम्मीद
निजी स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से वसूली जा रही फीस को लेकर प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा सरकार से की गई जवाबतलबी से अभिभावकों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जगी है।


हाईकोर्ट ने प्रधान सचिव शिक्षा से पूछा है कि हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षा संस्थान अधिनियम 1997 के अंतर्गत निजी स्कूलों पर लगाम लगाने के लिए क्या कारगर कदम उठाए हैं।

इस अधिनियम के प्रावधानों को लागू कराने के लिए किस अधिकारी को अधिकृत गया है। इस मामले को लेकर 20 दिसंबर को सुनवाई होनी है।

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