यूजीसी के नए नियमों के तहत होगी विवि में सहायक आचार्य की भर्ती
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में अब सहायक आचार्य के पद पर नियुक्तियां यूजीसी के नए नियमों के तहत होगी। विश्वविद्यालय ने भर्ती के नए नियमों को लागू कर दिया है। हालांकि, अभी विश्वविद्यालय विभागों में रिक्त पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन भर्ती के आरक्षित वर्ग के मामले का फैसला आने के बाद ही शुरू करेगा। कुलसचिव घनश्याम चंद ने कहा कि विश्वविद्यालय यूजीसी के तय नियमों के मुताबिक ही भर्ती करता है। नियम को अपना लिया है।
यूजीसी के सहायक आचार्य के पद पर भर्ती के लिए तय किए गए नए नियमों में छह शर्तें शामिल की गई हैं। यूजीसी की छह शर्तें पूरी करने वाले पीएचडी धारक ही प्रदेश विवि में सहायक प्रोफेसर पद के लिए पात्र होंगे। वर्ष 2009 से पहले पीएचडी करने वाला अभ्यर्थी इन शर्तों को पूरा करने पर ही नेट में छूट के साथ शिक्षक बनने के लिए पात्र होगा। वर्ष 2009 से पहले पीएचडी करने वालों को यूजीसी की ओर से नेट में छूट दी है।
शिक्षकों की भर्ती के लिए नेट/सेट और यूजीसी अधिनियम 2009 की 11 शर्तें लागू की थीं जिन्होंने यूजीसी अधिनियम 2009 के तहत पीएचडी नहीं की है। इन शर्तों में से छह को लागू करने का निर्णय ईसी ने लिया है। नियमों में कहा गया है कि सिर्फ रेगुलर आधार पर की गई पीएचडी डिग्री ही मान्य होगी, थिसीज का मूल्यांकन हो, शोधार्थी के अपने विश्वविद्यालय के अलावा दूसरे राज्यों से आए दो पर्यवेक्षकों का होना जरूरी किया गया है।
किसी समारोह में दो प्रस्तुति दी हो और उम्मीदवार की थिसीज कुलपति, प्रति कुलपति या डीन से प्रमाणित होना जरूरी किया गया है। छात्र की ओर से किए शोध कहीं छपना अनिवार्य है, जिसमें से एक प्रतिष्ठित पत्रिका में प्रकाशित किया होना चाहिए, मौखिक साक्षात्कार और वायवा अनिवार्य दिया हो।