एचपीयू में हर लेन-देन कैशलेस होगा, सभी विभाग होंगे ऑनलाइन
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हिमाचल विश्वविद्यालय को पूरी तरह ऑनलाइन और वेब इनेबल्ड बनाने की कवायद शुरू हो गई है। हाल ही में सामने आए प्रोस्पेक्टस घोटाले के बाद विवि इस कार्य को जल्द पूरा करना चाहता है। वर्ष 2016 में शुरू हुआ इंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) प्रोजेक्ट के तहत विवि के तमाम विभागों को ऑनलाइन किया जा रहा है। हालांकि, इस प्रोजेक्ट में देरी हुई है लेकिन परीक्षा विंग को ऑनलाइन करने का 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
विवि का दावा है कि अगले नए सत्र में एचपीयू को वेब इनेबल्ड (विवि की तमाम ऑनलाइन साइटों को आपस में जोड़ना) बना देंगे। विवि कॉरपोरेट ऑफिस की तरह अपने मानव संसाधन, वित्त, प्रशासनिक और परीक्षा विंग का संचालन आधुनिक तरीके से ऑनलाइन करेगा। परीक्षा का सिर्फ बीस फीसदी कार्य ऑफ लाइन ही चलेगा। दावा है कि साढ़े आठ करोड़ के इस प्रोजेक्ट को विवि आने वाले सत्र में पूरा कर लेगा।
अब तक यह कार्य हो चुका है पूरा
ईआरपी प्रोजेक्ट के तहत विवि की वित्त शाखा को ऑनलाइन किया गया है। कर्मचारियों के वेतन और सेवानिवृत्त कर्मियों की पेंशन का भुगतान उनके बैंक खाते में हो रहा है। परीक्षा विंग का 80 फीसदी काम ऑनलाइन हो चुका है। स्थापना शाखा में ऑनलाइन एंट्री और डाटा फिडिंग का कार्य अंतिम चरण में है। विवि के अधिकतर विभाग ऑनलाइन हो चुके हैं।
ऑनलाइन होगी छात्रावास आवंटन प्रक्रिया
विवि, ईआरपी प्रोजेक्ट के दूसरे चरण के बचे काम को जल्द पूरा कर लेगा। दावा है कि जुलाई में शुरू हो रहे सत्र में पीजी कोर्स में प्रवेश पाने वाले छात्र-छात्राओं को हॉस्टलों के कमरों का आवंटन भी ऑनलाइन किया जाएगा। गेस्ट हाउस, हेल्थ सेंटर और बाकी बचे प्रोफेशनल शिक्षण संस्थान भी ईआरपी प्रोजेक्ट में शामिल किए जाएंगे।
नए सत्र में विवि पूरी तरह वेब एनेबल्ड हो जाएगा। इक्डोल में प्रोस्पेक्टस घोटाले के उजागर होने के बाद विवि ने बीते सत्र से ही इक्डोल की पीजी की प्रवेश प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है। नए सत्र में फीस काउंटर को ऑनलाइन किया जा रहा है। अधिकतर कार्य कैश लेस होगा। - मुकेश कुमार, विवि के ईआरपी प्रोजेक्ट के मुखिया एवं कंप्यूटर सेंटर इंचार्ज