ईयर सिस्टम पर असमंजस में विद्यार्थी और शिक्षक, ये है वजह
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प्रदेश के डिग्री कॉलेजों में दाखिले शुरू हो गए हैं लेकिन इस सत्र से लागू ईयर सिस्टम पर विद्यार्थियों के साथ शिक्षक भी असमंजस में हैं। सोमवार से शुरू हुई प्रवेश प्रक्रिया को लेकर संबंधित कॉलेजों को शिक्षा विभाग की ओर से आधिकारिक रूप से कोई दिशा-निर्देश अभी तक नहीं मिले हैं।
शिक्षकों को यही मालूम नहीं कि ईयर सिस्टम में कैसे प्रवेश दिया जाना है। इसमें पुराना पैटर्न रहेगा या ईयर सिस्टम में प्रवेश को लेकर कुछ अतिरिक्त करना है।
अधिकतर कॉलेजों में प्रोस्पेक्ट्स बेचने के साथ प्रवेश फार्म भरकर जमा करवाने का क्रम शुरू हो गया है। दिशा-निर्देश के अभाव में कॉलेज प्रबंधन सीधे छात्रों के सब्जेक्ट कांबिनेशन चुनने और हर विषय की पूर्व में निर्धारित की गई सीटों के मुताबिक ही प्रवेश दे रहे हैं।
नए सिस्टम को लेकर ये असमंजस
इसमें यदि ईयर सिस्टम लागू करने पर कोई बदलाव लाया गया होगा, तो ईयर सिस्टम को लागू करने वाले कॉलेज प्रशासन और शिक्षकों की मुश्किलें आने वाले समय में और बढ़ जाएंगी।
कॉलेजों में ईयर सिस्टम में छात्र कैसे सब्जेक्ट कांबिनेशन एक साल के लिए चुनेगा, आवेदन फार्म की सब्जेक्ट कमेटी किस आधार पर छंटनी करेगी, ईयर सिस्टम में पूरे साल की फीस ली जानी है या सेमेस्टर की यही साफ नहीं है।
इसके अलावा कक्षाएं शुरू होने पर ईयर सिस्टम में एक कक्षा 40 मिनट की होगी या पुराने ईयर सिस्टम की तरह से एक घंटे की यह तक साफ नहीं किया गया है।
कॉलेजों को दी जानी चाहिए गाइडलाइन
प्रदेश राजकीय महाविद्यालय शिक्षक संघ के महासचिव रामलाल शर्मा ने माना कि कॉलेजों में प्रवेश से संबंधित कई समस्याएं होना लाजिमी है। समय रहते शिक्षा विभाग ईयर सिस्टम में प्रवेश को लेकर तय की गई नई गाइडलाइन कॉलेजों को जारी करे।
सेमेस्टर को ईयर में बदले जाने के देरी से लिए गए फैसले के चलते अधिकतर कॉलेजों में वही पुराना प्रोस्पेक्टस छपवाकर बेचा जा रहा है। इसमें प्रवेश को लेकर कोई नए नियम नहीं हैं। कॉलेजों में सेमेस्टर की तर्ज पर ही छात्रों से फार्म भरवाए जा रहे हैं। सब्जेक्ट कांबिनेशन भी वही है। हर विषय में अधिकतम 120 सीटें ही भरी जा रही हैं।