कॉलेजों में दाखिले के लिए इस बार हो सकती है देरी, ये है वजह
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रूसा सेमेस्टर सिस्टम खत्म के बाद सरकार के समक्ष ये चुनौती खड़ी हो गई है। सरकार ने अपना चुनावी वायदा पूरा करने को रूसा सेमेस्टर सिस्टम तो खत्म कर दिया है, लेकिन इसे लागू करना सरकार और एचपीयू के लिए बड़ी चुनौती है।
शिक्षा विभाग के कॉलेज अकादमिक शेड्यूल के मुताबिक 15 जून से कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी। ऐसे में एक हफ्ते के भीतर ईयर सिस्टम में छात्रों को प्रवेश देने की तैयारी करना विवि के लिए संभव नहीं है। ऐसे में यूजी डिग्री कोर्स के ईयर सिस्टम कॉलेजों में दाखिले में देरी हो सकती है।
सरकार की घोषणा के बाद अभी तक सिलेबस और सब्जेक्ट कंबिनेशन पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। दाखिले की प्रक्रिया को लेकर विवि और कॉलेजों के साथ प्रदेश के लाखों छात्र असमंजस में हैं। वहीं, अभी तक विवि को सरकार के फैसले के बाद कोई आदेश तक नहीं मिले हैं।
नया सिस्टम अपनाने के लिए ये चुनाैती
नया सिस्टम अपनाने से पहले सरकार के आदेश लागू करने को प्रदेश विश्वविद्यालय को तय प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसमें सिलेबस से लेकर रेगुलेशन बनाकर अधिसूचित करने की प्रक्रिया शामिल है।
आम तौर पर इसमें एक साल लग जाता है। सीमित समय और नाममात्र तैयारियों के बीच यूजी डिग्री ईयर सिस्टम में प्रवेश देने की समयसीमा बढ़ानी पड़ेगी। तय तारीख को पुराने सेमेस्टर सिस्टम में पड़ रहे तीसरे और पांचवें सेमेस्टर के छात्रों की रोलऑन एडमिशन ही संभव हो पाएगी और एक जुलाई से
इनकी पढ़ाई शुरू हो सकेगी। मामला प्रदेश के लाखों छात्रों से जुड़ा है तो सरकार के साथ विवि को भी पिछले कड़वे अनुभव ध्यान में रखकर आगे बढ़ना होगा। वहीं, रूसा लागू करते समय पूर्व कांग्रेस सरकार ने मार्च में तैयारी शुरू की थी, जबकि प्रवेश अगस्त माह तक हो पाया था।
नया सिस्टम अपनाने की यह है प्रक्रिया
उधर, शिक्षा सचिव अरुण शर्मा का कहना है कि यूजी में ईयर सिस्टम को लागू करने को लेकर तैयारी चल रही है, तय समय पर प्रवेश शुरू करने के प्रयास है। जल्द इसको लेकर स्थिति साफ कर दी जाएगी।
ईसी की बैठक बुलाकर विवि सरकार के आदेशों को अपनाने पर फैसला लेगा। इसके बाद डीएस सभी विभाग मुखियाओं और डीन्स के साथ बैठक कर सिलेबस, सब्जेक्ट कांबिनेशन और नए सिस्टम के रेगुलेशन तय करने के आदेश देंगे।
बोर्ड ऑफ स्टडीज उसी आधार पर काम कर रिपोर्ट देंगे, जो डीन फैकल्टी की बैठक में मंजूर होंगे। फिर अकादमिक काउंसिल की मंजूरी मिलने के बाद मामले को अंतिम मंजूरी के लिए ईसी में लाया जाएगा। इसके बाद नया सिस्टम लागू करने की अधिसूचना जारी होगी।