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पेंशन अदालत में पहुंचे 500 मामले, कई निपटाए

Fri, 23 Aug 2019 06:59 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पांवटा साहिब (सिरमौर)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पांवटा साहिब (सिरमौर) Published by: Krishan Singh Updated Fri, 23 Aug 2019 06:59 PM IST
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500 cases reached in pension court of Ministry of Defense in paunta himachal
- फोटो : अमर उजाला

पांवटा साहिब की पुरूवाला गोयल धर्मशाला में शुक्रवार को रक्षा मंत्रालय की ओर से पेंशन अदालत लगाई गई। 170वीं पेंशन अदालत में हिमाचल के अलावा उत्तराखंड और हरियाणा के सैनिकों और उनके आश्रितों से जुड़े मामले पहुंचे। पेंशन अदालत में कुल 500 मामले आए जिनमें से 332 मामले लिखित में पहुंचे। मेजर जनरल जीओसी संजीव चौधरी ने कहा कि नाहन में भूतपूर्व सैनिक सहायता केंद्र स्थापित है। इसमें पिछले कुछ वर्षों से करीब 78 करोड़ रुपये भूतपूर्व सैनिकों और वीर नारियों को दिलवाया जा चुका है। भूतपूर्व सैनिक संगठन पावंटा शिलाई अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह और महासचिव नरेंद्र सिंह ने कहा कि पेंशन अदालत में उत्तराखंड और हरियाणा के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी भूतपूर्व सैनिक और वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों के परिजन और वीरांगनाएं उपस्थित रहीं। 500 से अधिक भूतपूर्व सैनिक पेंशनर पहुंचे। 332 ने लिखित रुप से अपनी दिक्कतों को सैनिक परिवार की अदालत में रखा।

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सैकड़ों को मौके पर ही राहत देने का दावा किया गया है। पेंशन खामियों को ठीक करवाया गया। कार्यक्रम में मुख्य नियंत्रक सेंट्रल जनरल ऑफ डिफेंस अकाउंट (सीजीडीए) संजीव मित्तल, रक्षा महालेखा प्रधान नियंत्रक (पीसीडीए) विश्वजीत सिंह सहाय, ब्रिगेडियर एसके वर्मा, आईडीएएस (सीडए) टीए जार्जिया, सेना मुख्यालय (एजी ब्रांच) विभा सूद ने कहा कि देश की तीनों सेनाओं से सेवानिवृत्त हो चुके भूतपूर्व सैनिकों और वीरगति को प्राप्त हो चुके सैनिकों के परिवारों को रक्षा पेंशन अदालत में आ रही समस्याओं और विसंगतियों से छुटकारा मिल रहा है। इस अवसर पर डीसी सिरमौर आरके परुथी, एसपी सिरमौर अजय कृष्ण शर्मा, एएसपी विरेंद्र ठाकुर, एसडीएम पांवटा एलआर वर्मा, उद्यमी ज्ञान चंद गोयल, विश्वजीत सहाय, संजीव मित्तल, एसके वर्मा, एसपी खेड़ा, सोमदत्त, करनैल सिंह, तरुण गुरंग, नरेंद्र सिंह, दर्शन सिंह, वीरेंद्र सिंह, मोहन चौहान, तिलक राज मौजूद रहे।

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पूरा विश्व सैन्य पराक्रम से वाकिफ: मिश्र

राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि पूरा विश्व देश के वीर सैनिकों का पराक्रम और शौर्य जानता है। हमारे सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा के साथ जरूरत पड़ने पर प्राकृतिक आपदाओं में भी अपनी जान की बाजी लगा देते हैं।

केंद्र सरकार सैनिकों और शहीदों के परिवारों को सुविधाएं देने को तत्पर रहती है। देश में करीब 32 लाख सैनिक पेंशनर हैं। हिमाचल और उत्तराखंड से ही करीब 3 लाख पेंशनर हैं। डिजिटल इंडिया से हर समस्या का समाधान हो रहा है। 

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