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बीएड के लिए ढूंढे नहीं मिल रहे विद्यार्थी, खाली रह गईं 1891 सीटें
नरेंद्र एस. कंवर, अमर उजाला, शिमला
Updated Thu, 25 Oct 2018 12:55 PM IST
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विश्वविद्यालय से संबद्ध निजी बीएड कॉलेजों की 8 से 24 अक्तूबर तक पहले दौर की काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। पहले राउंड के बाद इन निजी बीएड कॉलेजों में स्टेट कोटा की 1891 सीटें खाली रह गई हैं। शिक्षक बनने के लिए लंबी होती जा रही प्रक्रिया और प्रतिस्पर्धा को देखते हुए 73 कॉलेजों में 1891 सीटें सिर्फ स्टेट कोटा की खाली रहने से साफ होता है कि युवाओं का बीएड कोर्स करने के लिए रुझान कम हो रहा है।
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शिक्षक बनने को पहले बीएड कोर्स, फिर टेट प्रतियोगी परीक्षा और फिर जाकर टीजीटी कमीशन पास करने के बाद शिक्षक बनने का सपना पूरा होता है। वहीं बीएड बैचवाइज नौकरी पाने के लिए भी टेट अनिवार्य किया गया है। जिससे बीएड किए हजारों युवा बेरोजगार घूम रहे है।
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इन कॉलेजों के लिए कुल 7000 सीटें मंजूर की गई हैं। मेडिकल की 606, नॉन मेडिकल की 351 जबकि आर्ट्स और कॉमर्स में बीएड की सबसे अधिक 934 सीटें खाली बच गई हैं। इन सीटों को भरने के लिए दीक्षांत समारोह के बाद काउंसलिंग का दूसरा राउंड होगा। यह एक से तीन नवंबर तक होना है। इसके बावजूद यदि ये सीटें न भर पाई तो, फिर आरक्षित क्षेणी की सीटें भी ओपन की जा सकती हैं या फिर निजी बीएड कॉलेज सरकार से कोई न कोई छूट को दिलवाकर इन्हें भरने के प्रयास करेंगे।
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सब्जेक्ट कांबिनेशन की शर्त के कारण भी बाहर हो गए अभ्यर्थी
बीएड कोर्स के लिए इस बार एचपीयू ने यूजी में पढ़े स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले सब्जेक्ट कांबिनेशन की शर्त को भी सख्ती से लागू करना भी सीटें खाली रहने की वजह बनी। रूसा सीबीसीएस च्वॉयस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम में स्नातक डिग्री करने वाले सैकड़ों छात्र बीएड के लिए पात्र ही नहीं बन पाए और बाहर हो गए।
अब एक से तीन नवंबर तक दूसरे दौर की काउंसलिंग
विवि की बीएड प्रवेश कमेटी के समन्वयक प्रो. नयन सिंह ने कहा कि इन खाली रही 1891 सीटों को भरने के लिए एक से तीन नवंबर तक काउंसलिंग का दूसरा चरण तय किया जाएगा। इसका शेड्यूल अलग से जारी किया जाएगा। जिसमें करीब चार हजार ऐसे पात्र अभ्यर्थी है जिन्होंने बीएड की प्रवेश परीक्षा दी है।