कम हुआ टीचर बनने का क्रेज, इस विषय के लिए आधे रह गए आवेदन
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भविष्य में प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में अध्यापकों की कमी आ सकती है। क्योंकि प्रदेश के युवा प्राथमिक अध्यापक बनने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि प्राथमिक अध्यापक बनने के लिए जरूरी दो वर्षीय डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंटरी एजूकेशन) कोर्स में दिनों दिन अभ्यर्थियों की संख्या कम होती जा रही है।
पहले जहां डीएलएड के लिए करीब 30 से 35 हजार आवेदन बोर्ड को मिलते थे। वहीं इस बार केवल 16121 युवाओं ने ही आवेदन किया है। शैक्षणिक सत्र 2016-18 में जहां पांच बार काउंसलिंग करने के बाद भी निजी शिक्षण संस्थानों में सीटें खाली रह गईं थीं।
वहीं डीएलएड के शैक्षणिक सत्र 2017-19 के लिए आयोजित प्रवेश परीक्षा के लिए स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से मांगे गए आवेदनों में भी इस बार करीब 50 फीसदी की कमी आई है। स्कूल शिक्षा बोर्ड की लोक संपर्क अधिकारी अंजू पाठक ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 12 सरकारी डाइट में 1800 सीटों को मिलाकर 29 निजी शिक्षण संस्थानों में कुल 3350 सीटें हैं।
आवेदन न करने के पीछे है ये बड़ा कारण
पूर्व के शैक्षणिक सत्रों में प्रदेश भर से करीब सात हजार से भी अधिक जेबीटी प्रशिक्षित ऐसे हैं, जिन्हें अभी भी नौकरी नहीं मिल पाई है। इसके अलावा जहां बीएड में जहां 50:50 के अनुपात में भर्तियां की जा रही हैं।
इसमें 50 फीसदी टेट कोटे और 50 फीसदी भर्तियां बैच बाइज की जा रही हैं। वहीं जेबीटी में बैचवाइज भर्ती की बजाय सभी भर्तियां टेट मेरिट पर ही की जा रही हैं। प्रदेश में डीएलएड प्रशिक्षित बेरोजगारों की लगी लंबी लाइन के चलते भी अब युवा डीएलएड करने से कतरा रहे हैं।
स्कूल शिक्षा बोर्ड को डीएलएड प्रवेश परीक्षा के लिए 16121 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें 1728 आवेदकों की फीस जमा नहीं हो पाई है। इन अभ्यर्थियों के फार्म रद्द कर दिए गए हैं। दस जुलाई तक यह अभ्यर्थी फीस की रसीद प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके बाद ही उक्त अभ्यर्थियों को रोल नंबर जारी किए जाएंगे।- चमन लाल, संयुक्त सचिव, स्कूल शिक्षा बोर्ड