चतुर्थ श्रेणी के 86 पदों के लिए 21 हजार आवेदन, एमए/बीएड वाले भी कतार में
- सचिवालय में चल रही है माली, फराश और चौकीदार के पदों की भर्ती
- इन पदों के लिए हाई स्कूल पास रखी गई है मिनिमम शैक्षणिक अर्हता
- दसवीं की बजाय पीजी, बीएड और डिप्लोमा धारकों ने किया आवेदन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के दावों के बावजूद प्रदेश में बेरोजगारी युवाओं को कुछ भी करने को मजबूर कर रही है। हालात यह है कि पढ़े-लिखे युवाओं को अपनी काबिलियत वाली नौकरी मिल नहीं रही। वे दसवीं पास वाली नौकरी पाने में भी संकोच नहीं कर रहे।
प्रदेश सचिवालय में चल रही माली, फराश और चौकीदार की भर्ती इसका उदाहरण है। इनके 86 पदों के लिए प्रदेश से 21 हजार से ज्यादा आवेदन आए हैं। इतने ज्यादा आवेदन आने से सचिवालय प्रशासन को इंटरव्यू के लिए जिलेवार आवेदकों को बुलाने की व्यवस्था करनी पड़ी है।
एक मई से शुरू हुई इंटरव्यू प्रक्रिया लगातार चलने के बाद भी अब तक सिर्फ पांच हजार इंटरव्यू ही हो पाए हैं। खास बात यह है कि इन दसवीं पास अर्हता वाले पदों के लिए ग्रेजुएट से लेकर पीजी, बीएड और डिप्लोमा धारक लाइन में हैं।
कम पढ़े युवाओं के लिए मुसीबत
नाम न लिखने की शर्त पर भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि जिन पदों के लिए आवेदन मांगे थे, उनका काम निमभन स्तर का है। चूंकि, पढ़े-लिखे युवा को काबिलियत से काफी निचले स्तर का काम मिलता है।
इसलिए उनमें हीन भावना होना या असंतोष होना स्वाभाविक है। अगर काम कम शैक्षणिक योग्यता वाले युवा को मिले तो वह उस काम को अपनी काबिलियत अनुसार होने के चलते मन लगाकर करता है।
सामने आई सरकारी नौकरी के क्रेज की बात
इंटरव्यू में उच्च शिक्षा प्राप्त आवेदकों से आवेदन करने का कारण पूछने पर या तो बेरोजगारी की मार का जवाब मिलता है या फिर सरकारी नौकरी का क्रेज सामने आता है। सरकारी नौकरी का क्रेज कहें या फिर बेरोजगारी की मार, कारण जो भी हो, लेकिन इन कम शैक्षणिक अर्हता वाले पदों पर उच्च शिक्षा प्राप्त आवेदकों के आने से कम पढ़े युवाओं का हक भी मारा जा रहा है।