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बस हादसों से सबक लेने को हर बार ‘ड्रामा’
Shimla
Updated Wed, 30 Jul 2014 05:31 AM IST
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शिमला। हिमाचल में हर बार बस हादसों से सबक लेने का ड्रामा होता है। सरकार के नुमाइंदे और अफसरान आमूल-चूल बदलाव की बातें करते हैं। नया बस हादसा होता है तो चंद दिनों तक हो-हल्ला मचता है। सड़क-परिवहन से जुडे़ तमाम महकमों में तालमेल की कमी दिखती है। फिर कुछ दिन में सब भुला दिया जाता है। तब तक कोई सुध नहीं लेते, जब तक किसी और बस दुर्घटना में 20 या 40 लोग मौत के घाट न उतरें। यह सिलसिला दशकों से चल रहा है।
सर्पीली पहाड़ी सड़कों से बस लुढ़की तो गहरी खाई में जाकर कचूमर बन जाती है। सड़क किनारे रेलिंग, पैरापिट जैसी रोक लगे तो शायद हादसे इतने न होतेे, मगर ये कैसे लगें। हिमाचल के भूगोल के माप से केंद्र सरकार से हिमाचल को सड़क सुधार को बजट नहीं मिलता। राज्य की हालत इतनी खराब है कि यह अपने स्तर पर सड़कों के गड्ढे तक ठीक नहीं कर सकता। खटारा, पुरानी या जर्जर हो चुकी बसों को एकदम बदला नहीं जा सकता। ऐसा करें तो कई रूट बंद होंगे। परिवहन व्यवस्था फिर ठप होगी। राज्य पथ परिवहन निगम की चार हजार बसें चलती हैं। हरेक सरकारी बस के साथ औसतन डेढ़ चालक मौजूद हैं। यानी दो बसों के साथ तीन ड्राइवर। उनमें भी कोई हृदयरोगी तो कई रक्तचाप, शूगर या डायबिटीज के मरीज हैं। अनेक शराब का सेवन करने वाले भी हैं। पुलिस महकमा हर सड़क, ड्राइवर या वाहन पर पैनी नजर रखने की स्थिति में नहीं है।
बॉक्स 1.
मंत्री जी! क्या 10 दिन बाद रुक जाएंगे हादसे
नई ट्रांसपोर्ट पालिसी की डेडलाइन पूरी हो रही है। महज 10 दिन शेष हैं। बलघार हादसे के बाद परिवहन मंत्री जीएस बाली ने 28 अप्रैल को शिमला के पीटरहॉफ में एक कार्यशाला में ऐलान किया था कि 100 दिन के भीतर परिवहन नीति लाई जाएगी। सवाल है कि क्या यह नीति बस हादसे रोक देगी।
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बॉक्स 2.
300 खटारा बसें दौड़ रहीं सड़कों पर
हिमाचल की सड़कों पर एचआरटीसी की 300 से ज्यादा खटारा या जर्जर बसें दौड़ रही हैं। तय सफ र सीमा को तकरीबन 500 बसें पूरा कर चुकी हैं। हाल ही में 400 नई बसें जरूर हिमाचल पहुंची हैं। इनमें सभी अभी चल नहीं रहीं।
बॉक्स 3.
सात माह में 1700 हादसों में 375 की मौत
पिछले सात महीनों में हिमाचल में छोटे बड़े लगभग 1700 हादसे हो चुके हैं। इन्हीं में बस दुर्घटनाएं भी शुमार हैं। एक दिसंबर से लेकर अब तक इन हादसों में तकरीबन 375 लोग जान गंवा चुके हैं।
बॉक्स 4.
314 ब्लैक स्पॉट चिन्हित, पर हादसे नहीं रुके
हिमाचल में पुलिस विभाग ने सड़कों पर 314 ब्लैक स्पाट चिन्हित कर रखे हैं। इन स्पाट पर परिवहन, लोक निर्माण और पुलिस विभाग के अधिकारियों की स्टेट रोड सेफ्टी काउंसिल में निरंतर चर्चाएं हो चुकी हैं। नतीजा कोई नहीं।
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सर्पीली पहाड़ी सड़कों से बस लुढ़की तो गहरी खाई में जाकर कचूमर बन जाती है। सड़क किनारे रेलिंग, पैरापिट जैसी रोक लगे तो शायद हादसे इतने न होतेे, मगर ये कैसे लगें। हिमाचल के भूगोल के माप से केंद्र सरकार से हिमाचल को सड़क सुधार को बजट नहीं मिलता। राज्य की हालत इतनी खराब है कि यह अपने स्तर पर सड़कों के गड्ढे तक ठीक नहीं कर सकता। खटारा, पुरानी या जर्जर हो चुकी बसों को एकदम बदला नहीं जा सकता। ऐसा करें तो कई रूट बंद होंगे। परिवहन व्यवस्था फिर ठप होगी। राज्य पथ परिवहन निगम की चार हजार बसें चलती हैं। हरेक सरकारी बस के साथ औसतन डेढ़ चालक मौजूद हैं। यानी दो बसों के साथ तीन ड्राइवर। उनमें भी कोई हृदयरोगी तो कई रक्तचाप, शूगर या डायबिटीज के मरीज हैं। अनेक शराब का सेवन करने वाले भी हैं। पुलिस महकमा हर सड़क, ड्राइवर या वाहन पर पैनी नजर रखने की स्थिति में नहीं है।
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मंत्री जी! क्या 10 दिन बाद रुक जाएंगे हादसे
नई ट्रांसपोर्ट पालिसी की डेडलाइन पूरी हो रही है। महज 10 दिन शेष हैं। बलघार हादसे के बाद परिवहन मंत्री जीएस बाली ने 28 अप्रैल को शिमला के पीटरहॉफ में एक कार्यशाला में ऐलान किया था कि 100 दिन के भीतर परिवहन नीति लाई जाएगी। सवाल है कि क्या यह नीति बस हादसे रोक देगी।
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300 खटारा बसें दौड़ रहीं सड़कों पर
हिमाचल की सड़कों पर एचआरटीसी की 300 से ज्यादा खटारा या जर्जर बसें दौड़ रही हैं। तय सफ र सीमा को तकरीबन 500 बसें पूरा कर चुकी हैं। हाल ही में 400 नई बसें जरूर हिमाचल पहुंची हैं। इनमें सभी अभी चल नहीं रहीं।
बॉक्स 3.
सात माह में 1700 हादसों में 375 की मौत
पिछले सात महीनों में हिमाचल में छोटे बड़े लगभग 1700 हादसे हो चुके हैं। इन्हीं में बस दुर्घटनाएं भी शुमार हैं। एक दिसंबर से लेकर अब तक इन हादसों में तकरीबन 375 लोग जान गंवा चुके हैं।
बॉक्स 4.
314 ब्लैक स्पॉट चिन्हित, पर हादसे नहीं रुके
हिमाचल में पुलिस विभाग ने सड़कों पर 314 ब्लैक स्पाट चिन्हित कर रखे हैं। इन स्पाट पर परिवहन, लोक निर्माण और पुलिस विभाग के अधिकारियों की स्टेट रोड सेफ्टी काउंसिल में निरंतर चर्चाएं हो चुकी हैं। नतीजा कोई नहीं।