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हिमाचल में होगी वॉयस सैंपल की जांच

Wed, 23 Jul 2014 05:30 AM IST
Shimla
Shimla Updated Wed, 23 Jul 2014 05:30 AM IST
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शिमला। अब किसी भी रिकार्डिगिं में किसी कथित अपराधी की वॉयस सैंपल की जांच हिमाचल में ही संभव होगी। यही नहीं, राज्य फोरेंसिक साइंस लैब जुन्गा में अब साइबर अपराध के सबूतों की जांच भी होगी। यानी हिमाचल की जांच एजेंसियोें को अब राज्य से बाहर की चंडीगढ़, हैदराबाद आदि की प्रयोगशालाओं पर निर्भर नहीं रहना होगा। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने यह ऐलान मंगलवार को शिमला में हिमाचल प्रदेश फोरेंसिक विज्ञान विकास बोर्ड की आठवीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए किया।
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह कहा कि शुरुआत में इस तकनीक को फोरेंसिक विज्ञान मुख्यालय जुन्गा में शामिल किया जाएगा। बाद में धर्मशाला और मंडी में स्थापित क्षेत्रीय केंद्रों में इसे शुरू किया जाएगा। वीरभद्र सिंह ने स्वर पहचान एवं डिजीटल तकनीकी को अपनाने पर बल दिया, क्योंकि जांच में डिजीटल साक्ष्यों से अधिक पुष्ट हो जाती है। आपराधिक अभियोजन के क्षेत्र में फोरेंसिक विज्ञान की भूमिका महत्वपूर्ण है, जिससे अपराधियों को कानूनी तौर पर दंडित किया जा सके। कई अपराध अनसुलझे रह जाते हैं और आधुनिक डिजीटल तकनीकी के अभाव में अपराधी कई बार सजा से बच जाते हैं। न्यायालय में जांच और प्रस्तुतीकरण के लिए दिए गए साक्ष्य यदि उच्च स्तर के हों तो जांचकर्ताओं को भी भरोसा होगा। उन्होंने साइबर फोरेंसिक डिविजन को भी सुदृढ़ करने की जरूरत पर बल दिया। बोर्ड ने राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला तथा क्षेत्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में डिजास्टर विक्टिम आइडेंटीफिकेशन सेल स्थापित करने को मंजूरी प्रदान की। इसी दौरान राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला जुन्गा में वायस आइडेंटिफिकेशन डिवीजन तथा डिजीटल फॉरेंसिक डिविजन जैसी दो नई विशेषज्ञताओं को देने की स्वीकृति प्रदान की। इससे पूर्व फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला जुन्गा के निदेशक अरुण शर्मा ने राज्य में एफएसएल की उपलब्धियों पर पावर प्वाइंट प्रस्तुति दी तथा बोर्ड को उपलब्धियों की जानकारी दी। साथ ही लैब कर्मियों के लिए सीबीआई की तर्ज पर विशेष भत्ता देने की मांग उठाई। बैठक में लैब को भवन, स्टाफ क्वार्टर, ट्रेनिंग प्रोग्राम और अन्य मुद्दों को भी मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के समक्ष रखा गया। इस अवसर पर महाधिवक्ता श्रवण डोगरा, मुख्य सचिव पी. मित्रा, पुलिस महानिदेशक संजय कुमार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एसआर ओझा, गृह मंत्रालय के मुख्य फोरेंसिक वैज्ञानिक एके गंजू तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
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