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लारजी प्रबंधन की गलती नहीं : वीरभद्र
Shimla
Updated Sun, 15 Jun 2014 05:32 AM IST
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शिमला। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि लारजी हादसे में लारजी बिजली परियोजना के प्रबंधकों की कोई गलती नहीं है। वह शिमला के रिज मैदान पर रेडक्रॉस मेले के समापन के दौरान मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे। मुख्यमंत्री का ये बयान ऐसे वक्त में आया है, जब हादसे के कारणों पर चल रही जांच अभी पूरी नहीं हुई है। सरकार को सोमवार को हाईकोर्ट में जवाब भी देना है।
वीरभद्र सिंह से पूछा गया कि तेलंगाना के एक मंत्री ने अचानक पानी छोड़ने वाले लारजी बिजली परियोजना प्रबंधन को दोषी ठहराया है। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना प्रबंधन की गलती नहीं दिखती। हालांकि, थोड़ी देर बाद उन्होंने दोबारा कहा कि राज्य सरकार ने इस हादसे की जांच मंडलायुक्त मंडी आेंकार शर्मा को दी है। उन्हें 15 दिनों में रिपोर्ट देने को कहा गया है। जब तक रिपोर्ट नहीं आती, तब तक कुछ भी कहना संभव नहीं है। इसलिए सभी को इंतजार करना होगा। इतना तय है कि ये हादसा अचानक आए पानी से बहने के कारण हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां तक ब्यास नदी को खाली कर भी लाशें न मिलने का सवाल है तो राज्य सरकार तब तक सर्च आपरेशन जारी रखेगी, जब तक अंतिम लाश नहीं मिल जाती। रविवार 8 जून को हुए इस हादसे पर सरकार को सोमवार को हाईकोर्ट में भी जवाब देना है। हाईकोर्ट ने स्व संज्ञान लेते हुए जवाब तलब किया था। दूसरी ओर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अलग से नोटिस दिया है। इसमें सरकार को दो सप्ताह के भीतर जवाब देना है।
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वीरभद्र सिंह से पूछा गया कि तेलंगाना के एक मंत्री ने अचानक पानी छोड़ने वाले लारजी बिजली परियोजना प्रबंधन को दोषी ठहराया है। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना प्रबंधन की गलती नहीं दिखती। हालांकि, थोड़ी देर बाद उन्होंने दोबारा कहा कि राज्य सरकार ने इस हादसे की जांच मंडलायुक्त मंडी आेंकार शर्मा को दी है। उन्हें 15 दिनों में रिपोर्ट देने को कहा गया है। जब तक रिपोर्ट नहीं आती, तब तक कुछ भी कहना संभव नहीं है। इसलिए सभी को इंतजार करना होगा। इतना तय है कि ये हादसा अचानक आए पानी से बहने के कारण हुआ है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां तक ब्यास नदी को खाली कर भी लाशें न मिलने का सवाल है तो राज्य सरकार तब तक सर्च आपरेशन जारी रखेगी, जब तक अंतिम लाश नहीं मिल जाती। रविवार 8 जून को हुए इस हादसे पर सरकार को सोमवार को हाईकोर्ट में भी जवाब देना है। हाईकोर्ट ने स्व संज्ञान लेते हुए जवाब तलब किया था। दूसरी ओर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अलग से नोटिस दिया है। इसमें सरकार को दो सप्ताह के भीतर जवाब देना है।
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