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निशाने पर नहीं लगा विजिलेंस का तीर
Shimla
Updated Sat, 24 May 2014 05:35 AM IST
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शिमला। हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के खिलाफ दर्ज तीसरी एफआईआर में विजिलेंस की जांच फिर रुक गई है। एचपीसीए पर आरोप है कि होटल पवेलियन बनाने के लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए थे। लेकिन अब तक की जांच विजिलेंस को कोई ऐसे सबूत हाथ नहीं लगे हैं, जिससे साबित हो सके कि होटल की जगह पर कभी कोई पेड़ भी थे।
आरोप साबित करने के लिए सबूत जुटाने को लेकर विजिलेंस की धर्मशाला टीम ने फोरेस्ट सर्वे आफ इंडिया देहरादून सेे सेटेलाइट के माध्यम से पेड़ों की जानकारी के बारे में रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन एफ एसआई ने किसी भी तरह की रिपोर्ट देने से इनकार कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि इतने छोटे एरिया की सेटेलाइट इमेज संभव नहीं है, ऐसे में उन्होंने विजिलेंस से किसी दूसरी एजेंसी से सहायता लेने का सुझाव दिया है। अब विजिलेंस को अपने ही आरोप साबित करने के लिए सबूत जुटाना मुश्किल साबित हो रहा है। विजिलेंस ने आरोप लगाया था कि होटल निर्माण के लिए 1500 से अधिक पेड़ काटे गए। इसके लिए विजिलेंस के जांच अधिकारियों ने तर्क दिया कि होटल परिसर में मौजूद पेड़ से अंदाजा लगाया जा सकता है कि होटल स्थल पर भी मौजूदा पेड़ के आकार के पेड़ हो सकते हैं। इन्हीं आरोपों के आधार पर विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज की थी।
वन विभाग ने विजिलेंस को दी रिपोर्ट में भी पेड़ों की मौजूदगी के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इस रिपोर्ट के बाद विजिलेंस ने देहरादून फोरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया से सहयोग मांगा था। डीआईजी एपी सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि अभी दूसरी एजेंसी से सहयोग को लेकर निर्णय नहीं लिया है।
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आरोप साबित करने के लिए सबूत जुटाने को लेकर विजिलेंस की धर्मशाला टीम ने फोरेस्ट सर्वे आफ इंडिया देहरादून सेे सेटेलाइट के माध्यम से पेड़ों की जानकारी के बारे में रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन एफ एसआई ने किसी भी तरह की रिपोर्ट देने से इनकार कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि इतने छोटे एरिया की सेटेलाइट इमेज संभव नहीं है, ऐसे में उन्होंने विजिलेंस से किसी दूसरी एजेंसी से सहायता लेने का सुझाव दिया है। अब विजिलेंस को अपने ही आरोप साबित करने के लिए सबूत जुटाना मुश्किल साबित हो रहा है। विजिलेंस ने आरोप लगाया था कि होटल निर्माण के लिए 1500 से अधिक पेड़ काटे गए। इसके लिए विजिलेंस के जांच अधिकारियों ने तर्क दिया कि होटल परिसर में मौजूद पेड़ से अंदाजा लगाया जा सकता है कि होटल स्थल पर भी मौजूदा पेड़ के आकार के पेड़ हो सकते हैं। इन्हीं आरोपों के आधार पर विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज की थी।
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वन विभाग ने विजिलेंस को दी रिपोर्ट में भी पेड़ों की मौजूदगी के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इस रिपोर्ट के बाद विजिलेंस ने देहरादून फोरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया से सहयोग मांगा था। डीआईजी एपी सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि अभी दूसरी एजेंसी से सहयोग को लेकर निर्णय नहीं लिया है।
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