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सेब आयात शुल्क पर हिमाचल को झटका!
Shimla
Updated Fri, 25 Apr 2014 05:30 AM IST
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शिमला। सेब उत्पाद शुल्क मामले में हिमाचल को बड़ा झटका लग सकता है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने दोहा में हाल की दो महत्वपूर्ण बैठकों में सेब को विशेष उत्पाद घोषित करने का मुद्दा नहीं रखा। बताते हैं कि कृषि उत्पादों में केवल गन्ना और कॉटन पर ही चर्चा हो पाई है। यही हाल रहा तो भारत के लिए करमुक्त विदेशी सेब आना शुरू हो जाएगा। इसका खामियाजा हिमाचल में लाखों सेब बागवानों को भुगतना पड़ेगा।
केंद्र सरकार से जुडे़ सूत्रों के अनुसार विश्व व्यापार संगठन की कृषि समितियों की दोहा में दो बैठकें 21 और 28 मार्च 2014 को हुई हैं। इनमें कृषि उत्पादों में केवल गन्ना और कपास को लेकर चर्चा हुई । इस चर्चा के बाद विशेष उत्पाद सूची बननी है। इसमें जो उत्पाद रखे जाएंगे, उन पर आयात शुल्क बरकरार रहेगा। बाकी सभी कृषि उत्पादों का आयात नि:शुल्क हो जाएगा। कुछ माह पहले आरटीआई की एक सूचना में भी केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने यह माना था कि दोहा राउंड की वार्ता में विशेष उत्पादों की सूची पर चर्चा होगी। इसमें अगर सेब को विशेष श्रेणी में रखा जाता है, तो इस पर आयात शुल्क घटेगा नहीं।
बाक्स--------
अभी तीन बैठकें और
कृषि समितियों की अगली वार्ता बैठकें 6 जून, 31 जुलाई और 14 नवंबर को रखी गई हैं। इनमें भी अगर सेब पर चर्चा नहीं हुई तो हिमाचल को झटका लगना तय है।
बाक्स--------
50 प्रतिशत है आयात शुल्क
मौजूदा समय में विदेशों से सेब के आयात पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क है। केवल सार्क देशों का ही सेब नि:शुल्क भारत आता है। अगर 50 प्रतिशत आयात शुल्क घटकर शून्य पर आ जाता है तो विदेशों के कोल्ड स्टोरों से भारत की मंडियों में बाहरी सेब सस्ती दरों पर उपलब्ध होगा। मंडियों में हिमाचल का सेब इनका मुकाबला नहीं कर पाएगा।
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कोट्स--------
मेरी भारत सरकार के महानिदेशक (निर्यात) से बात हुई है। यह सही है कि दोहा राउंड की हाल की वार्ता में कॉटन पर ही बात हुई है। अभी और भी बैठकें होनी हैं। सेब को विशेष उत्पाद घोषित करने को लेकर उसी में चर्चा संभावित है।
-प्रकाश ठाकुर, उपाध्यक्ष, हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद, विपणन एवं विधायन निगम (एचपीएमसी)।
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केंद्र सरकार से जुडे़ सूत्रों के अनुसार विश्व व्यापार संगठन की कृषि समितियों की दोहा में दो बैठकें 21 और 28 मार्च 2014 को हुई हैं। इनमें कृषि उत्पादों में केवल गन्ना और कपास को लेकर चर्चा हुई । इस चर्चा के बाद विशेष उत्पाद सूची बननी है। इसमें जो उत्पाद रखे जाएंगे, उन पर आयात शुल्क बरकरार रहेगा। बाकी सभी कृषि उत्पादों का आयात नि:शुल्क हो जाएगा। कुछ माह पहले आरटीआई की एक सूचना में भी केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने यह माना था कि दोहा राउंड की वार्ता में विशेष उत्पादों की सूची पर चर्चा होगी। इसमें अगर सेब को विशेष श्रेणी में रखा जाता है, तो इस पर आयात शुल्क घटेगा नहीं।
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अभी तीन बैठकें और
कृषि समितियों की अगली वार्ता बैठकें 6 जून, 31 जुलाई और 14 नवंबर को रखी गई हैं। इनमें भी अगर सेब पर चर्चा नहीं हुई तो हिमाचल को झटका लगना तय है।
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50 प्रतिशत है आयात शुल्क
मौजूदा समय में विदेशों से सेब के आयात पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क है। केवल सार्क देशों का ही सेब नि:शुल्क भारत आता है। अगर 50 प्रतिशत आयात शुल्क घटकर शून्य पर आ जाता है तो विदेशों के कोल्ड स्टोरों से भारत की मंडियों में बाहरी सेब सस्ती दरों पर उपलब्ध होगा। मंडियों में हिमाचल का सेब इनका मुकाबला नहीं कर पाएगा।
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मेरी भारत सरकार के महानिदेशक (निर्यात) से बात हुई है। यह सही है कि दोहा राउंड की हाल की वार्ता में कॉटन पर ही बात हुई है। अभी और भी बैठकें होनी हैं। सेब को विशेष उत्पाद घोषित करने को लेकर उसी में चर्चा संभावित है।
-प्रकाश ठाकुर, उपाध्यक्ष, हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद, विपणन एवं विधायन निगम (एचपीएमसी)।