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हमारे संसाधन, हमसे ही वसूली

Fri, 11 Apr 2014 05:31 AM IST
Shimla
Shimla Updated Fri, 11 Apr 2014 05:31 AM IST
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शिमला। हिमाचल में बन रहा सीमेंट अगर यहां पड़ोसी राज्यों पंजाब-हरियाणा से महंगा मिले तो हैरानी तो होगी ही, लेकिन ये हकीकत है। जिस उत्पाद को बनाने के लिए हिमाचल के ही संसाधन लग रहे हों, उसका यहां महंगा होना व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है। राज्य में वर्तमान में तीन कंपनियां अंबुजा, एसीसी और जेपी कंपनी सीमेंट बना रही हैं। कुल 7 यूनिट इनके चल रहे हैं, लेकिन लाइसेंस शुदा वस्तु न होने के कारण इसके रेट सरकार तय नहीं कर सकती। ये बाजार की मांग पर तय होते हैं।
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यही कारण है कि जहां सरकारी सीमेंट का बैग 164 रुपये का है तो वहीं खुले बाजार में इसकी कीमत 320 से 360 रुपये तक भी है। इन सभी कंपनियों के साथ एमओयू काफी पुराने हैं। उस समय रेट संबंधी कोई शर्त एमओयू में नहीं जोड़ी गई थी। अब नए एमओयू के वक्त संभव है कि सरकार इस बारे में कोई शर्त लगाए। हिमाचल देश और विश्व के लिए जंगल बचा रहा है। यहां हरे पेड़ काटने पर प्रतिबंध है। हर साल वन क्षेत्र भी बढ़ रहा है, लेकिन पेड़ काटकर बेच नहीं सकते। बदले में जो मुआवजा मिलना चाहिए था, वो नहीं मिला।
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अब विद्युत उत्पादन के क्षेत्र को देखिए। देश में ऊर्जा की मांग पूरी नहीं हो रही। हिमाचल बिजली बना रहा है, लेकिन इस क्षेत्र में रिफार्म्स न होने के कारण रेट अच्छे नहीं मिल रहे। हिमाचल में 1990 से पहले के बिजली प्रोजेक्टों में 12 फीसदी फ्री बिजली नहीं मिल रही। जोगिंद्रनगर में शानन प्रोजेक्ट और बीबीएमबी प्रोजेक्ट में हिस्सा नहीं मिला, जबकि प्रोजेक्ट हमारे यहां हैं और इनके लिए बेघर भी हिमाचल के लोग हुए। हिमाचल विधानसभा ने यहां उत्पादित की जा रही बिजली पर जनरेशन टैक्स लगाने की अनुमति मांगी थी। एक विधेयक राष्ट्रपति को भेजा गया, लेकिन आज तक मंजूरी नहीं मिली। किन्नौर सबसे ज्यादा बिजली बनाता है, लेकिन यदि सप्लाई ठप हो जाए तो स्थानीय लोग नजदीकी प्रोजेक्ट से बिजली नहीं ले सकते।
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इनसेट
हमने कम करवाए सीमेंट के रेट : मुकेश
उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री कहते हैं कि सीमेंट के रेट राज्य सरकार के हाथ में नहीं है, लेकिन फिर भी कांग्रेस सरकार ने सरकारी सप्लाई का रेट पिछले साल से बढ़ने नहीं दिया। इस बार चुनाव के दौर में कुछ कंपनियों ने रेट बढ़ाए थे। उन्हें वापस करवाया गया। हम हर संभव कोशिश कर रहे हैं कि प्रदेश के लोगों को पड़ोसी राज्यों से ज्यादा कीमत न चुकानी पड़े। अन्य मसलों पर भारत सरकार से मसले उठाए गए हैं।

इनसेट
जनरेशन टैक्स की बात नहीं उठाई : दत्त
भाजपा प्रवक्ता गणेश दत्त कहते हैं कि सीमेंट रेट पर कांग्रेस सरकार पिछले एक साल से झूठ बोल रही है। सीमेंट कंपनियों गुपचुप प्रति बैग 15 रुपये रेट बढ़ा रही हैं और फिर 3 रुपये कम कर दे रही हैं। बिजली पर जनरेशन टैक्स का विधेयक भाजपा सरकार ने पारित कर भेजा था, लेकिन पिछले एक साल में कांग्रेस सरकार ने इसे फॉलो नहीं किया। इन मसलों को अब एनडीए सरकार बनने के बाद उठाया जाएगा।
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