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मालरोड पर तैयार हुआ बंबर का फर्जी डेओ

Fri, 29 Nov 2013 05:45 AM IST
Shimla
Shimla Updated Fri, 29 Nov 2013 05:45 AM IST
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शिमला। हिमाचल भवन में कमरा बुक करने के लिए कांग्रेस विधायक बंबर ठाकुर के नाम से फर्जी लेटर भी मालरोड पर स्थित साइबर कैफे में ही तैयार किया गया था। कंप्यूटर पर इसकी एक कॉपी जांच के दौरान मिली है। इस मामले में अलग से आरोपी के खिलाफ थाने में मुकदमा दर्ज है। फर्जी डीओ नोट के आधार पर आरोपी संजय गुलेरिया ने तबादले करवाने और नौकरी लगाने के नाम पर करीब तीन लाख में सौदेबाजी की है। इस तरह के कई खुलासे आरोपी ने पुलिस के सामने किए हैं।
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पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि वह सचिवालय में एक मंझोले अधिकारी के संपर्क में था। शिक्षा विभाग से संबंधित एक तबादले के लिए उसने इस अधिकारी को 20 हजार दिए। पैसा लेने के बावजूद जब उक्त शिक्षक का तबादला नहीं हुआ तो वह माजरा जानने के लिए उसके पास मुख्यमंत्री ब्रांच में गया। लेकिन अधिकारी तबादले के वायदे से मुकर गया। वहां डीओ लेटर पैड पड़े थे, जो उसने चुरा लिए। शुरू के डीओ लेटर पैड सटीक भाषा में लिखे न होने के कारण बर्बाद हो गए। इस बीच वह फिर उस अधिकारी के पास गया और कहा कि तबादले और नियुक्ति को लेकर डीओ नोट में क्या भाषा लिखी जाती है, उसका ड्राफ्ट बनाकर दे दिया करे, इसकी एवज में अच्छी खासी रकम दे दूंगा। इसके बाद से डीओ लेटर पैड पर सटीक भाषा होती और इसमें शक की कोई गुंजाइश नहीं होती। लेकिन लेक्चरर संजीव कुमार का तबादला रोहडू से ऊना करवाना महंगा साबित हुआ। फर्जी डीओ नोट शिक्षा विभाग की पकड़ में आ गया और इस फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया। तब तक वह सात डीओ नोट जारी कर चुका था। इसके बाद पकड़े जाने के भय से उसने बाकी डीओ लैटर पैड जला दिए। हालांकि अभी भी शिक्षा विभाग में तबादले की सिफारिश को लेकर तीन फर्जी डीओ नोट गए हैं।
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पूर्व सरकार में भी दिया नौकरी का झांसा
आरोपी संजय गुलेरिया ने भाजपा सरकार के दौरान भी एक युवक को क्लर्क की नौकरी दिलाने के नाम पर पैसों की ठगी की है। प्रदेश में जब सत्ता बदली और कांग्रेस ने सरकार संभाली तब पीडि़त युवक ने सामने आकर अपने साथ हुई ठगी की शिकायत थाना सदर में दर्ज करवाई। इसी मामले में यह अभी थाना सदर पुलिस की हिरासत में है। इसके अलावा भी आरोपी पर कई आपराधिक मामले चल रहे हैं।
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असिस्टेंट मैनेजर की नियुक्ति के लिए 50 हजार
सुंदरनगर की रहने वाली महिला के पति ने थाना छोटा शिमला में पुलिस को बताया कि स्टेट को आपरेटिव बैंक में असिस्टेंट मैनेजर की नियुक्ति के लिए उनसे संजय गुलेरिया ने पचास हजार लिए।


क्या कहती है पुलिस
डीएसपी सिटी पंकज शर्मा ने कहा कि थाना छोटा शिमला प्रभारी विक्रम और उनकी टीम के कारण मामले से इतना जल्दी पर्दा उठ पाया है। असिस्टेंट मैनेजर वाले मामले में संजय गुलेरिया को 50 हजार दिए गए हैं। लिहाजा पैसा देने वाला भी आरोपी बनता है। उन्हें भी गिरफ्तार किया जा रहा है।
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