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रेल बजट में अब तक मिले दिलासे
Shimla
Updated Mon, 25 Feb 2013 05:31 AM IST
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नालागढ़ (सोलन)। प्रदेश को मिले औद्योगिक पैकेज के बाद विश्व के मानचित्र पर फार्मा हब के रूप में उभरा औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में रेल के नाम पर अब तक आश्वासन ही मिले हैं। सर्वाधिक 63 फीसदी राजस्व देने वाले बीबीएन को आज भी रेलवे की दरकार है। हालांकि पूर्व भाजपा सरकार ने बद्दी में कंटेनर डिपो खोलने की घोषणा तो कर दी थी, लेकिन यह कंटेनर डिपो भी तभी काम करना शुरू करेगा, जब यह क्षेत्र रेलवे सुविधा से जुड़ेगा।
रेलवे का सबसे अधिक लाभ उद्योगपतियों व प्रवासी कामगारों को मिलना है, लेकिन आज भी रेलवे सुविधा के लिए लोगों को कालका का रुख करना पड़ता है और उद्योग जगत को अपना कच्चा माल व तैयार माल भेजने में परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। नालागढ़ उद्योग संघ के प्रेस सचिव अनिल शर्मा और बीबीएन उद्योग संघ के अध्यक्ष अरुण रावत ने कहा कि सरकार ने उद्यमियों को स्पेशल पैकेज में लाभ देने की घोषणा की थी, जिसमें आबकारी एवं आयकर विभाग की ओर से कहा गया था कि उद्योगपति पहाड़ी क्षेत्रों में अपने उद्योग स्थापित करेंगे तो केंद्र सरकार व प्रदेश सरकार उन्हें विशेष रूप से मदद करेगी। उद्योगपतियों ने हजारों करोड़ की पूंजी का निवेश औद्योगिक क्षेत्रों बीबीएन सहित कालाअंब, ऊना आदि में तो किया, लेकिन उद्योगपतियों को रेलवे सुविधा नसीब नहीं हो पाई है।
बीते वर्ष के रेल बजट में सिर्फ हुआ सर्वे
बद्दी से कालका के बीच में बड़ी रेल लाइन के लिए सर्वेक्षण की रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी गई। सर्वेक्षण के मुताबिक इस रेलवे लाइन के निर्माण पर 385.75 करोड़ रुपये की लागत आंकी। बीते वर्ष वर्ष हुए रेल बजट में बीबीएन क्षेत्र से गुजरने वाले दो रेलवे मार्ग को सिर्फ योजना आयोग को स्वीकृति के लिए भेजा था, जिसमें घनौली-देहरादून वाया नालागढ़-बद्दी-बरोटीवाला-कालाअंब-पांवटा साहिब और बद्दी-कालका-लेह, घनौली-बददी-टांडा-होशियारपुर और होशियारपुर-ऊना शामिल थे।
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सीएम ने गंभीरता से उठाया केंद्र से मामला
भवन एवं अन्य निर्माण कामगार वर्क बोर्ड के चेयरमैन बावा हरदीप सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार बीबीएन औद्योगिक क्षेत्र को रेलवे सुविधा से जोड़ने के मसले को लेकर गंभीर है और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी इस मामले को पुरजोर ढंग से केंद्र सरकार के समक्ष उठाया है, जिससे यह क्षेत्र रेलवे सुविधा से जुड़ सके।
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रेलवे का सबसे अधिक लाभ उद्योगपतियों व प्रवासी कामगारों को मिलना है, लेकिन आज भी रेलवे सुविधा के लिए लोगों को कालका का रुख करना पड़ता है और उद्योग जगत को अपना कच्चा माल व तैयार माल भेजने में परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। नालागढ़ उद्योग संघ के प्रेस सचिव अनिल शर्मा और बीबीएन उद्योग संघ के अध्यक्ष अरुण रावत ने कहा कि सरकार ने उद्यमियों को स्पेशल पैकेज में लाभ देने की घोषणा की थी, जिसमें आबकारी एवं आयकर विभाग की ओर से कहा गया था कि उद्योगपति पहाड़ी क्षेत्रों में अपने उद्योग स्थापित करेंगे तो केंद्र सरकार व प्रदेश सरकार उन्हें विशेष रूप से मदद करेगी। उद्योगपतियों ने हजारों करोड़ की पूंजी का निवेश औद्योगिक क्षेत्रों बीबीएन सहित कालाअंब, ऊना आदि में तो किया, लेकिन उद्योगपतियों को रेलवे सुविधा नसीब नहीं हो पाई है।
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बीते वर्ष के रेल बजट में सिर्फ हुआ सर्वे
बद्दी से कालका के बीच में बड़ी रेल लाइन के लिए सर्वेक्षण की रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी गई। सर्वेक्षण के मुताबिक इस रेलवे लाइन के निर्माण पर 385.75 करोड़ रुपये की लागत आंकी। बीते वर्ष वर्ष हुए रेल बजट में बीबीएन क्षेत्र से गुजरने वाले दो रेलवे मार्ग को सिर्फ योजना आयोग को स्वीकृति के लिए भेजा था, जिसमें घनौली-देहरादून वाया नालागढ़-बद्दी-बरोटीवाला-कालाअंब-पांवटा साहिब और बद्दी-कालका-लेह, घनौली-बददी-टांडा-होशियारपुर और होशियारपुर-ऊना शामिल थे।
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सीएम ने गंभीरता से उठाया केंद्र से मामला
भवन एवं अन्य निर्माण कामगार वर्क बोर्ड के चेयरमैन बावा हरदीप सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार बीबीएन औद्योगिक क्षेत्र को रेलवे सुविधा से जोड़ने के मसले को लेकर गंभीर है और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी इस मामले को पुरजोर ढंग से केंद्र सरकार के समक्ष उठाया है, जिससे यह क्षेत्र रेलवे सुविधा से जुड़ सके।