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World Population Day 2025: भारत में परिवार नियोजन की असली क्रांति की जननी कौन थीं? जानिए पूरी कहानी

Fri, 11 Jul 2025 05:42 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Fri, 11 Jul 2025 05:42 PM IST
सार

Founder Of Family Planning Program Dhanvantari Rama Rau : धनवंतरी रामा राऊ, भारत की फैमिली प्लानिंग नीति की असली निर्माता हैं, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि सशक्त महिला वह होती है, जो समाज की दिशा बदलने की हिम्मत रखती है।
 

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World Population Day 2025 Founder Of Family Planning Program Dhanvanthi Rama Rau Biography in Hindi
धनवंतरी रामा राउ - फोटो : FPAIndia.org

विस्तार

World Population Day 2025: विश्व जनजंख्या दिवस हर साल 11 जुलाई को मनाया जाता है। पूरी दुनिया आज आबादी बढ़ने को लेकर चिंतित है। इसके कारण हो रही समस्याओं पर विचार कर रही है और जनसंख्या नियंत्रण के प्रयास कर रही है। लेकिन जनसंख्या दिवस जैसा कोई दिन मनाने की शुरुआत होने से कई दशकों पहले ही भारत में इसकी आवश्यकता को समझकर जनसंख्या नियंत्रण पर काम किया जाने लगा था। जब पूरी दुनिया जनसंख्या वृद्धि को लेकर चुप थी, तब भारत की एक महिला ने न सिर्फ आवाज उठाई, बल्कि वो क्रांति शुरू की जिसकी गूंज आज भी सुनाई देती है। धनवंतरी रामा राऊ, भारत की फैमिली प्लानिंग नीति की असली निर्माता हैं, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि सशक्त महिला वह होती है, जो समाज की दिशा बदलने की हिम्मत रखती है।

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World Population Day 2025: 11 जुलाई को क्यों मनाया जाता है विश्व जनसंख्या दिवस? वजह जानकर चौंक जाएंगे    
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धनवंतरी रामा राऊ ने रखी फैमिली प्लानिंग प्रोग्राम की नींव

1952 में भारत दुनिया का पहला देश बना जिसने आधिकारिक रूप से फैमिली प्लानिंग प्रोग्राम शुरू किया। लेकिन इसकी नींव कई साल पहले धनवंतरी रामा राऊ द्वारा रखी जा चुकी थी। उन्होंने महसूस किया कि जब तक महिलाएं अनचाहे गर्भधारण और मजबूरी के मातृत्व से जूझती रहेंगी, तब तक प्रगति केवल दिखावा होगी।
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शिक्षा से सशक्तिकरण तक

1893 में एक कश्मीरी ब्राह्मण परिवार में जन्मी धनवंतरी ने मद्रास के प्रेसीडेंसी कॉलेज से ग्रेजुएट की डिग्री हासिल की। इसके बाद वह भारत की पहली महिला प्रोफेसर बनीं। बाद में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय महिला सम्मेलन में भारत का नेतृत्व किया और ब्रिटिश महिलाओं को सीधा सवाल किया,  “भारत की महिलाओं की समस्याओं पर चर्चा लंदन में क्यों?”


एक महिला ने बदली पुरुषों की सोच 

उनकी पहल पर बने Family Planning Association of India (1949) ने जागरूकता फैलाई और 5 लाख से भी ज्यादा पुरुषों ने स्वेच्छा से स्थायी नसबंदी को अपनाया। यह उस समय की सबसे बड़ी मानसिक क्रांति मानी जाती है।


 
अंतरराष्ट्रीय पहचान और पद्म भूषण सम्मान

धनवंतरी रामा राऊ इंटरनेशनल प्लांड पैरेंटहुड फैडरेशन की सह-संस्थापक बनीं और उन्हें 1959 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। उन्होंने न केवल जनसंख्या नियंत्रण पर काम किया बल्कि बाल विवाह, महिला शिक्षा, और आत्मनिर्भरता पर भी आंदोलन छेड़ा।


विरासत आज भी जिंदा

1987 में उनके निधन के साथ एक युग का अंत जरूर हुआ लेकिन हर वह महिला जो आज अपने जीवन के फैसले खुद लेना चाहती है, उसमें कहीं ना कहीं धनवंतरी की सोच की झलक जरूर होती है।

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