'मैं भी कर सकती हूं' और 'ये जहाज मुझे मेरी मंजिल तक ले जाएंगे।' बचपन में ऐसा सोचने वाली एक लड़की बन गई जांबाज नौसेना अधिकारी। हाथ में कॉल लेटर लेकर पहुंच गईं जहाजों को 'शुक्रिया' बोलने। और वो नाम था-सब लेफ्टिनेंट लताश्री। लताश्री को भारतीय नौसेना ने छोटी सी उम्र में खास पहचान दी। आइए जानते हैं अमर उजाला से विशेष बातचीत में सब लेफ्टिनेंट लताश्री ने कैसे अपने जज्बात जाहिर किए।
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आपको सेना में आने की प्रेरणा कहां से मिली?
लताश्री- मैं विशाखापत्तनम से हूं, यहां पर ईस्टर्न कमांड है, बचपन से यह जगह प्रेरणा देती रही है। मैं जब छोटी थी तब घंटों तक समंदर के इन जहाजों को आता-जाता देखती रहती थी । नेवी के जहाजों को देखकर मुझे प्रेरणा मिलती थी, मैंने बचपन से बस नेवी का सपना देखा और उसको पूरा कर दिखाया। अगर आप अपने सपनों पर ईमानदारी से काम करते हैं तो वो जरूर पूरे होते हैं बस जरूरत है संकल्प और धैर्य से उन पर काम करने की।
खासतौर से नेवी में आने के पीछे आपका मकसद क्या था?
लताश्री- इसमें कोई शक नहीं है कि नेवी की यूनिफॉर्म मेरे लिए सबसे बड़ा आकर्षण रहा है। नेवी यूनिफॉर्म पहनना मेरे लिए सपने के पूरा होने जैसा था। इस यूनिफॉर्म को पहनकर आप आसमान छू सकते हैं और सबसे महत्वपूर्ण देशसेवा का शानदार मौका देती है नेवी। बस एक ही मकसद है देश के लिए कुछ करना है। नेवी की नौकरी में पंखों को उड़ान मिलती है।
सकारात्मक सोच के साथ देश का नाम करना चाहती हूं-सब लेफ्टिनेंट लताश्री
आने वाले कुछ सालों में आप अपने आपको किस मुकाम पर देखना चाहती हैं, कुछ सोचा है इस बारे में ?
लताश्री-सकारात्मक सोच के साथ देश का नाम करना चाहती हूं। माता-पिता को मुझ पर गर्व महसूस हो और मेरे देश को मुझ पर नाज हो यही मेरा सपना है। हमें ऐसा बनना चाहिए जिससे लोगों को प्रेरणा मिले और आपको देखकर वो भी अपने सपनों को पूरा करने की हिम्मत करें ।
जब भी आपका हौसला टूटा तो किस तरह आपने खुद को फिर से तैयार किया लड़ने के लिए?
लताश्री-मेरा हौसला कभी नहीं टूटता, हम नेवी में एक परिवार की तरह काम करते हैं और एक दूसरे को हौसला देते हैं, बस आगे बढ़े चलो, ना रुको और ना डरो। जब आप अच्छा काम करते हैं और लोग आपको देखकर फक्र महसूस करते हैं यह ही सबसे बड़ी ताकत होती है।
जब भी माता- पिता से बात होती हैं तो इमोशनल महसूस करती हैं?
लताश्री- हां, खासकर मां से बात करते हुए, मगर में उस पल बहुत मजबूत रहती हूं क्योंकि मुझे देखकर उनकी आंखों में चमक आ जाती हैं। फौज मतलब हिम्मत,मैं इसको अपना मंत्र मानती हूं। हमें अपने संघर्ष से सीखना चाहिए मगर सबसे ज्यादा जरूरी है अपनी मजबूती को पहचान कर उस पर काम करना।
'शक्ति' को पहचान कर उसको अपने सपने पूरा करने में लगा दो'
आपने नेवी में आने से पहले मर्सिडीज बेंज और टाटा कंसल्टेंसी में भी काम किया है और फिर नेवी में रुख?
लताश्री- नेवी में आने से पहले मैंने मर्सिडीज बेंज में काम किया था और फिर एसएसबी में मेरा सलेक्शन हो गया, बिलकुल ऐसा लगा जैसे सपनों को पंख मिल गए हों।
शक्ति के माध्यम से महिलाओं के लिए आपका सन्देश?
लताश्री- हमें अपने आप को कमजोर नहीं समझना चाहिए, सपने देखने चाहिए, उनपर मजबूत कदम से चलना चाहिए और अपने सपनों को पूरा करने के लिए अपनी ताकत लगा देनी चाहिए। कुछ करने के लिए सबसे जरूरी है मजबूत इरादों से खड़ा होना।
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