कभी घर के आंगन में किलकारी बनकर घूमने वाली बेटियां अब दहलीज से बाहर शासन के दरवाजों पर दस्तक देती दिख रही हैं। छोटे कस्बे से निकली बेटियां हों या मेट्रो सिटी की पेंपर्ड गर्ल दोनों ही आने वाली पीढ़ियों के लिए मानक स्थापित कर रही हैं। बचपन से पिता और माता के शासन में पली बढ़ीं ये बेटियां अब शासन में पहुंचकर जनता तक योजनाओं को सही ढंग से पहुंचाने को कटिबद्ध हैं। पुरुषों के मुकाबले कहीं अधिक संवेदनशील ये महिला अधिकारी जनता की समस्या को न केवल दिमाग से बल्कि दिल से हल करने की कोशिश कर रही हैं।
हौंसले को सलाम, घर के आंगन से निकल शासन की बागडोर संभालती बेटियां
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एटा, कानपुर में प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद अगस्त 2019 में कांठ में एसडीएम के तौर पर तैनाती मिली। प्रेरणा सिंह कहती हैं कि जिस माहौल में परवरिश हुई उसके मुकाबले फील्ड पर काफी अंतर है। मेरा प्रयास है कि प्रशिक्षण के दौरान जो सपने हमने देखे हैं उनको सेवा के दौरान लागू करके जनता की अधिक से अधिक सेवा करूं। उन्होंने कहा कि बेटियां अपनी शिक्षा पर ध्यान दें। आत्मनिर्भर बनें, आने वाला युग उनका है।
मुझे मेरे कस्बे, जिले और देश ने इतना कुछ दिया है कि जीवन भर सेवा करने के बाद भी ऋण नहीं चुका सकती। हैदराबाद जैसे कांड से आहत इल्मा कहती हैं कि पुलिस की नौकरी में बेटी होने के नाते मेरा पहला कर्त्तव्य होगा बेटियों पर होने वाले अत्याचारों को पुरजोर तरीके से रोकना। वो चाहती हैं कि सभी मां-बाप अपनी बेटियों को खूब पढ़ाएं और आत्मनिर्भर बनाएं। वो बेटियों से भी यही इच्छा रखती हैं कि वह मां-बाप के भरोसे को बनाए रखें और उनके सपनों का सम्मान करें।
लेकिन पुलिस में भर्ती होकर वर्दी पहनने का अपना सपना पूरा कर लिया। पूनम की वर्तमान में तैनाती मुरादाबाद में सीओ कटघर के पद पर है। इससे पहले उनका चयन पीपीएस राजस्थान में हुआ था। वह दो साल तक हसनपुर में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात रही।

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