Independence Day 2025: स्वतंत्रता संग्राम की वो वीरांगनाएं, जिनकी बहादुरी से कांप उठी थी अंग्रेजी हुकूमत
Independence Day 2025 : स्वतंत्रता दिवस के 79वें वर्षगांठ पर आइए जानते हैं उन नायिकाओं के बारे में, जिन्होंने इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अपना नाम दर्ज कराया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Inpendence Day 2025: भारत का स्वतंत्रता संग्राम केवल पुरुषों के संघर्ष तक सीमित नहीं था। इस महान यज्ञ में महिलाओं ने भी उतनी ही साहसिक और निर्णायक भूमिका निभाई। इन वीरांगनाओं ने अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें हिलाने के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी, सामाजिक बंधनों को तोड़ा और मातृभूमि के सम्मान के लिए अनगिनत बलिदान दिए। स्वतंत्रता संग्राम में साहसी और निडर महिलाओं के अदम्य साहस की गाथा भी शामिल है। इन वीरांगनाओं ने अपने जीवन, परिवार और सुख-सुविधाओं की परवाह किए बिना मातृभूमि की आज़ादी के लिए अंग्रेजी हुकूमत का डटकर सामना किया। उनके साहस, बलिदान और संघर्ष की कहानियां आज भी हर भारतीय के हृदय में गर्व और प्रेरणा का संचार करती हैं। स्वतंत्रता दिवस के 79वें वर्षगांठ पर आइए जानते हैं उन नायिकाओं के बारे में, जिन्होंने इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अपना नाम दर्ज कराया।
रानी लक्ष्मीबाई
झांसी की रानी लक्ष्मीबाई 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की सबसे प्रमुख योद्धा थीं। अंग्रेजों ने ‘लैप्स नीति’ के तहत उनकी झांसी छीनने का प्रयास किया, लेकिन रानी ने दृढ़ता से प्रतिरोध किया। उन्होंने अपने दत्तक पुत्र को पीठ पर बांधकर घोड़े पर सवार होकर अंग्रेजी सेना से मोर्चा लिया। ग्वालियर की लड़ाई में उन्होंने वीरगति पाई।
बेगम हजरत महल
अवध की रानी बेगम हजरत महल ने 1857 के विद्रोह में अपनी असाधारण नेतृत्व क्षमता दिखाई। अपने पुत्र बिरजिस क़द्र को गद्दी पर बिठाकर उन्होंने लखनऊ से अंग्रेजों को बाहर खदेड़ दिया। हालांकि बाद में उन्हें नेपाल में निर्वासन में रहना पड़ा, लेकिन उनके साहस और देशभक्ति की मिसाल अनोखी है।
Independence Day 2025: आजाद भारत की 5 बहादुर महिलाएं, जिनसे हर लड़की को प्रेरणा लेनी चाहिए
भीकाजी कामा
पेरिस में रहते हुए भीकाजी कामा ने 1907 में जर्मनी के स्टुटगार्ट में भारतीय स्वतंत्रता का पहला तिरंगा फहराया। उन्होंने भारत की आज़ादी के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज़ उठाई और क्रांतिकारियों को गुप्त रूप से मदद पहुंचाई।
अरुणा आसफ अली
‘दिल्ली की रानी’ कहलाई जाने वाली अरुणा आसफ़ अली ने 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में अंग्रेजी हुकूमत को सीधी चुनौती दी। उन्होंने बंबई में तिरंगा लहराकर आंदोलन की चिंगारी को प्रज्वलित किया। उन्हें बाद में ‘भारतरत्न’ से सम्मानित किया गया।
सरोजिनी नायडू
कवयित्री, वक्ता और स्वतंत्रता सेनानी सरोजिनी नायडू को ‘भारत कोकिला’ कहा जाता है। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बनीं और सत्याग्रह, महिलाओं के अधिकार व आज़ादी के लिए अनवरत संघर्ष किया।
कस्तूरबा गांधी
महात्मा गांधी की जीवनसंगिनी कस्तूरबा गांधी ने सत्याग्रह और असहयोग आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। वे कई बार जेल गईं और समाज में महिलाओं को आज़ादी की लड़ाई में शामिल करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
दुर्गावती देवी
भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की साथी ‘दुर्गा भाभी’ ने अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाए। उन्होंने भगत सिंह को अंग्रेजों की गिरफ्त से बचाने में मदद की और साहसपूर्वक क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया।
उषा मेहता
उषा मेहता ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में ‘गुप्त रेडियो’ संचालित कर देशभर में क्रांतिकारी संदेश प्रसारित किए। अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार किया, लेकिन उनका मनोबल कभी नहीं टूटा।

कमेंट
कमेंट X