राम मंदिर : गिनीज बुक में दर्ज होंगे श्रीराम, अन्न से बना रहे भगवान की आकृति
एबीवीपी संगठन ने इस आकृति को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए पंजीकरण किया है। गिनीज बुक की टीम 22 जनवरी को संगम तट पर पहुंचकर इस आकृति को दुनिया की सबसे बड़ी आकृति होने का प्रमाण पत्र जारी करेगा।
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अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर पूरा देश राममय हो उठा है। इसी कड़ी में संगम नगरी में लगे माघ मेला में प्रभु श्रीराम की एक भव्य आकृति अन्न से उकेरी जा रही है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से संगम तट पर 30 फीट लंबी और 50 फीट चौड़ी भगवान राम और राम मंदिर की आकृति को उकेरा जा रहा है।
एबीवीपी संगठन ने इस आकृति को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए पंजीकरण किया है। गिनीज बुक की टीम 22 जनवरी को संगम तट पर पहुंचकर इस आकृति को दुनिया की सबसे बड़ी आकृति होने का प्रमाण पत्र जारी करेगा।
एबीवीपी के काशी प्रांत के संगठन मंत्री अभिलाष मिश्रा ने बताया कि माघ मेला में विश्व हिंदू परिषद के कैंप कार्यालय में इस आकृति को शुक्रवार से ही बनाया जा रहा है। इस कार्य में कुल 40 छात्र-छात्राओं का एक गुट जुटा हुआ है। इनमें छात्राओं की संख्या 30 है। अभिलाष ने कहा कि रविवार की देर रात तक आकृति को बना दिया जाएगा। सोमवार को अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद कैंप में इस प्रदर्शनी को सभी के लिए खोल दिया जाएगा।
संगठन के प्रदेशीय मीडिया प्रभारी अभिनव मिश्रा ने कहा कि प्रभु श्रीराम की आकृति बनाने में अन्न व रंगोली के प्राकृतिक रंगों का सहारा लिया जा रहा है। अन्न में गेहूं, चावल, सोयाबीन, उड़द, मक्का, मसूर, फलीदाना, राजमा, मूंग, चना, तुअर की दाल और ज्वार शामिल हैं।
मानव श्रृंखला बनाकर देंगे एकता का संदेश
माघ मेला क्षेत्र में भगवान राम की भव्य आकृति की प्रदर्शनी लगाने के साथ ही एबीवीपी की ओर से मानव श्रृंखला बनाकर एकता का संदेश भी दिया जाएगा। साथ ही नुक्कड़ नाटक के माध्यम से प्रभु श्रीराम के जीवन की गाथा को भी दिखाया जाएगा।
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दिन संगम तट पर जगमगाएंगे 5,100 दीप
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दिन, 22 जनवरी को संगम तट पर 5,100 दीप जलाए जाएंगे। अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा, प्रयागराज की शनिवार को बक्शी बांध स्थित कार्यालय में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया।
महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं रामकृष्ण तिवारी ने बताया कि 22 जनवरी को शाम चार बजे भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद मां गंगा की आरती की जाएगी। बड़ी संख्या में दीप जलाकर भगवान राम के चरणों में अर्पित करेंगे। इस उत्सव में संत महात्माओं समेत अन्य लोग शामिल होंगे। बैठक में सुभाष पांडेय, चंद्रनाथ चकहा, मधु, बनवारी लाल पाठक, श्रवण कुमार शर्मा, राजेंद्र पालीवाल, माधवानंद शर्मा, अमितराज वैद्य, अनूप त्रिपाठी आदि ने हिस्सा लिया।