Ram Mandir: कमलनाथ-नकुलनाथ भी राम भक्ति में लीन, 4.31 करोड़ राम नाम पत्रकों को अयोध्या भेजने की तैयारी
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विस्तार
कांग्रेस नेतृत्व ने भले ही अयोध्या के राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का न्योता ठुकरा दिया हो, लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ राम भक्ति में लीन नजर आ रहे हैं। कमलनाथ छिंदवाड़ा से 4 करोड़ 31 लाख राम नाम लिखे पत्रकों को अयोध्या भेजने की तैयारी कर रहे हैं।
दरअसल, 22 जनवरी के उत्सव को ध्यान में रखते हुए छिंदवाड़ा की मारुति नंदन सेवा समिति ने 21 दिनों का श्रीराम महोत्सव का आयोजन किया है। इस महोत्सव में संस्थान लोगों को राम नाम के पत्रक बांट रहा है। इसमें रामभक्तों और लोगों से 108 बार राम लिखकर वापस देने के लिए कहा जा रहा है। समिति की कोशिश है कि राम नाम के इस रिकॉर्ड संग्रह को प्राण प्रतिष्ठा उत्सव के दौरान ही अयोध्या पहुंचाया जाए। छिंदवाड़ा के सिमरिया स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर का प्रबंधन इसी समिति के हाथ में है। कमलनाथ और उनके सांसद बेटे नकुलनाथ इस समिति के संरक्षक हैं। ये मंदिर भी कमलनाथ ने ही बनवाया है। श्रीराम महोत्सव के दौरान छिंदवाड़ा-पांढुर्णा जिले में रामरक्षा स्त्रोत की पुस्तिका भी बांटी जा रही है। इस पुस्तिकाओं के कवर पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और सांसद नकुलनाथ की तस्वीर छपी है।
कुछ इस तरह चल रहा है ये उत्सव
मारुति नंदन सेवा समिति का आयोजन तीन चरणों में किया जा रहा है। 4 जनवरी से राम नाम लेखन का काम शुरू किया गया है, जो 21 जनवरी तक चलेगा। कांग्रेस धर्मस्व प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष आनंद बक्षी इसी समिति के संयोजक हैं। बक्षी कहते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर सनातन धर्म की आस्था का प्रतीक है। राम हिंदुओं के आदर्श हैं। 500 साल बाद भव्य मंदिर में श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। ये कोई राजनीतिक आयोजन नहीं है। इस आयोजन को सियासी चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। अमर उजाला से चर्चा में मध्यप्रदेश भाजपा के प्रवक्ता नरेंद्र सलुजा कहते हैं कि कमलनाथ जी को मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की करारी हार के बाद, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद और कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा साइड लाइन करने के बाद अब भगवान राम की याद आ रही है। यदि पहले ही भगवान राम को याद कर लेते तो, उनकी शरण में चले जाते तो आज यह स्थिति नहीं होती।
आयोजन में कमलनाथ-नकुलनाथ हो चुके हैं शामिल
7 जनवरी को छिंदवाड़ा के सांसद नकुलनाथ ने भी समिति के इस आयोजन में हिस्सा लिया। पत्रक पर 108 बार राम का नाम लिखा। इसके बाद लोगों को संबोधित करते हुए नकुलनाथ ने कहा, ये एतिहासिक कार्यक्रम है। आने वाले समय में छिंदवाड़ा से चार करोड़ 31 लाख राम नाम लिखे पत्रकों का रिकॉर्ड बनेगा। उन्होंने ये भी कहा कि छिंदवाड़ा की जनता इस बार ये रिकॉर्ड बनाने के साथ-साथ लोकसभा में भी जीत का रिकॉर्ड बनाएगी। मारूति नंदन सेवा समिति के श्री राम महोत्सव में पूर्व सीएम कमलनाथ भी शामिल हुए थे। 10 जनवरी को सिमरिया स्थित हनुमान मंदिर पहुंचकर कमलनाथ ने 108 बार राम का नाम पत्रक पर लिखा। उनके साथ बेटे नकुलनाथ भी थे।
अपने गढ़ को बचाने की कवायद में कमलनाथ
कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ का धर्म के प्रति झुकाव नया नहीं है। विधानसभा चुनाव से पहले भी कमलनाथ और नकुलनाथ ने छिंदवाड़ा में दो बड़े धार्मिक आयोजन करवाए थे। मारुति नंदन सेवा समिति के बैनर तले सीहोर वाले पंडित प्रदीप मिश्रा और बागेश्वर धाम वाले पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा का आयोजन हुआ था। इन आयोजनों ने लाखों की संख्या में लोग पहुंचे थे। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस आयोजन के पीछे कमलनाथ के क्या राजनीतिक इरादे हैं, इसे वे ही बेहतर बता सकते हैं। लेकिन ये आयोजन कांग्रेस की रीति-नीति से मेल नहीं खाता। लेकिन अयोजन की भव्यता से यही लगता है कि कमलनाथ अपने गढ़ को बचाना चाहते हैं। इसलिए ऐसे आयोजन न केवल करवा रहे हैं, बल्कि इसमें शामिल भी हो रहे हैं। क्योंकि भाजपा का लोकसभा चुनाव को लेकर छिंदवाड़ा में फोकस बढ़ गया है। भाजपा के नेता यहां पर लगातार दौरे कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं को भी भाजपा नेता कह रहे हैं कि इस बार छिंदवाड़ा समेत सभी 29 सीटें जीतकर मध्यप्रदेश में रिकॉर्ड बनाना है। ऐसे में कांग्रेस खेमे में थोड़ी बैचेनी बढ़ी हई है।
दरअसल, छिंदवाड़ा कांग्रेस के मजबूत गढ़ में से एक है। 1951 के पहले आम चुनाव से लेकर 2019 के चुनाव तक यहां कांग्रेस की पकड़ मजबूत रही है। 1980 से लेकर 2019 तक इस सीट पर कमलनाथ परिवार का ही कब्जा रहा है। 1997 के उपचुनाव में भाजपा ने एक बार ही इस सीट पर जीत हासिल की थी। सुंदरलाल पटवा ने उस समय कमलनाथ को मात दी थी। इसके अगले साल हुए चुनाव में कमलनाथ ने एक बार फिर सीट पर कब्जा जमा लिया था। कमलनाथ के अलावा उनकी पत्नी अलका नाथ भी यहां से सांसद रह चुकी हैं और अब बेटा नकुलनाथ सांसद है।
पत्रक ऐसे पहुचेंगे अयोध्या
समिति के लोगों का कहना है कि लोगों के बीच चार लाख पत्रक बांटे गए हैं। छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जिले के हर ब्लॉक के 10 हजार कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन पत्रकों पर भक्तों को लाल स्याही से 108 बार राम नाम लिखना है। इस तरह चार लाख पत्रकों के जरिए चार करोड़ 31 लाख बार राम नाम लिखने का लक्ष्य तय हुआ है। 21 जनवरी को इन पत्रकों को ब्लॉक स्तर पर इकट्ठा किया जाएगा। इसके बाद पत्रकों की यात्रा निकाली जाएगी। 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होगी, उसी दिन उंटखाने स्थित छिंदवाड़ा के प्राचीन राम मंदिर में इन पत्रकों को रखा जाएगा। आयोजकों का कहना है कि सरकार ने 22 जनवरी को गैर आमंत्रित भक्तों के लिए अयोध्या में प्रवेश की मनाही की है, इसलिए प्रतिबंध खुलने का इंतजार होगा। अयोध्या में आवाजाही की अनुमति मिलते ही इन पत्रकों को अयोध्या रवाना कर दिया जाएगा। वहां पूजा अर्चना के बाद इन्हें राम नाम बैंक में जमा किया जाएगा। अब हर भक्त तो इस अवसर पर अयोध्या नहीं जा सकता, इसलिए कोशिश है कि राम नाम लिखे पत्रकों के जरिए भक्तों की भावना अयोध्या पहुंच जाए।