{"_id":"65af7b43c7df965f480b5eb4","slug":"ram-only-in-hearts-of-people-today-he-is-also-on-everyone-lips-2024-01-23","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Ram Mandir: तब राम केवल लोगों के हृदय में थे, आज सबकी जुबां पर भी हैं","category":{"title":"Ram Mandir","title_hn":"राम मंदिर","slug":"ram-mandir"}}
Ram Mandir: तब राम केवल लोगों के हृदय में थे, आज सबकी जुबां पर भी हैं
Tue, 23 Jan 2024 02:09 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 23 Jan 2024 02:09 PM IST
विज्ञापन
रामलला का दिव्य रूप
- फोटो : अमर उजाला
हिंदू धर्म की सप्तपुरियों अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, (वाराणसी) कांची, (कांचीपुरम, तमिलनाडु), अवंतिका (उज्जयिनी) और द्वारिकाधाम (गुजरात) में से अयोध्या की उदासी मिट गई है। श्रीराम के भव्य मंदिर से यह शहर जहां पूरे भारत में आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बन रहा है, वहीं पर्यटन स्थली के तौर पर यह शहर आने वाले समय में रोजगार का भी बड़ा केंद्र बनेगा। अयोध्या के आंदोलन से जुड़े रहे लोगों का कहना है कि आने वाले समय में यह शहर पूर्वांचल में आर्थिक बदलाव का संवाहक बनेगा।
विज्ञापन
यह परिवर्तन युगांतरकारी
अयोध्या में आया परिवर्तन युगांतरकारी है। नब्बे के दशक में मंदिर आंदोलन से लोग दिल से जुड़ते थे, लेकिन सामने राम का नाम लेने से हिचकते थे। आज देखिए, पूरा देश राम मय है। जितना आयोजन भाजपा या संघ ने किया होगा, उससे कई गुना अधिक कार्यक्रम लोग स्वयं कर रहे हैं। हर मंदिर, हर गांव, हर मुहल्ले में राम मंदिर को लेकर आयोजन किया गया है। लोग अपने घरों में दिवाली मना रहे हैं, जगह-जगह प्रसाद बांट रहे हैं, यही परिवर्तन है। अयोध्या भी बदली है। राम मंदिर आंदोलन के दौरान जो लोग अयोध्या में रहे हैं, वे आज अयोध्या के रास्तों को पहचान नहीं पा रहे। अयोध्या ने आज त्रेता युग का वैभव पा लिया है।-रमापति राम त्रिपाठी, सांसद देवरिया
विज्ञापन
मंदिर निर्माण के साथ बदल गया अयोध्या का माहौल
हम बचपन से अयोध्या आते रहे हैं। राम मंदिर आंदोलन के दौरान तो यहां अनगिनत बार आना जाना हुआ। लेकिन इसकी उदासी हमेशा कचोटती थी। गलियां, सड़कें, लाइटों की दशा खराब थी। हर तरफ पुलिस का पहरा हुआ करता था। मंदिर तक जाने के लिए इतनी बाधाएं पार करनी होती थी कि लोग आना ही नहीं चाहते थे। लेकिन, अब सब कुछ बदल गया है। अगर आप अयोध्या के एयरपोर्ट पर जाएंगे तो देखेंगे कि इतना सुंदर एयरपोर्ट तो लखनऊ में भी नहीं है। करीब 12 किलोमीटर लंबे एयरपोर्ट मार्ग पर फूलों के गमले रखे हैं। शहर के अंदर सड़कों पर रंग बिरंगी लाइटें लगी हैं। हर तरफ दिव्य उजाला फैला है। एक ही अलग ही प्रकार की अनुभूति यहां घूमने पर हो रही है।-विष्णु अजीत सरिया, उद्योगपति
विज्ञापन
आज के उल्लास ने वर्षों का दर्द भुला दिया
अयोध्या के मंदिर आंदोलन ने हजारों लोगों को असहनीय दर्द दिया था। दरअसल यह लड़ाई केवल मंदिर नहीं बल्कि हिंदू धर्म के अस्तित्व से जुड़ा था। इसीलिए लोग सैकड़ाें वर्षों से धर्मयुद्ध लड़ रहे थे। मैं अपने मां-बाप का इकलौता बेटा हूं। अयोध्या में आंदोलन के दौरान जब मुझे गोली लगी तो मेरी मां रोने लगी। घरवालों की परेशानी के चलते मैंने अपना इलाज गोरखपुर के अस्पताल में कराया। सोमवार की दोपहर में जब मंदिर में श्रीराम लला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी, तो मन इतना आनंदित था कि उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता। बस इतना समझ लिजिए कि 33 साल पहले गोली लगने से जो दर्द मिला था, आज जाकर उससे आराम मिला है। आज का दिन असंख्य कारसेवकों के बलिदान का परिणाम है। इसलिए हर कारसेवक के घर में आज दिवाली है।-आद्या सिंह, कारसेवक
आध्यात्म के साथ रोजगार का केंद्र बनेगी अयोध्या
अयोध्या को अगर देश के नक्शे के हिसाब से देखें तो वह केंद्र में है। इसीलिए त्रेता युग में इसे अवधपुरी की राजधानी बनाया गया होगा। मंदिर निर्माण के साथ यह शहर अब औद्योगिक केंद्र भी बनेगा। पहले की अयोध्या और आज की अयोध्या में जमीन आसमान का अंतर है। यह शहर सड़क, रेल और हवाई मार्ग से केवल इसलिए नहीं जुड़ रहा कि यहां लोग मंदिर का दर्शन करने आएंगे। बल्कि, यह आने वाले समय में वाराणसी, मथुरा, उज्जैन की तरह ही धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र होगा। अयोध्या के विकास के साथ पूर्वांचल का विकास होगा। आज अयोध्या में तमाम नए होटल और रेस्टोरेंट खुल रहे हैं। लोग वहां घर खरीद रहे हैं तो अयोध्या में हो रहे बदलाव को समझ सकते हैं।- एसके अग्रवाल चेंबर ऑफ इंड्रस्टी के तत्कालीन सचिव एसके अग्रवाल
अयोध्या के मंदिर आंदोलन ने हजारों लोगों को असहनीय दर्द दिया था। दरअसल यह लड़ाई केवल मंदिर नहीं बल्कि हिंदू धर्म के अस्तित्व से जुड़ा था। इसीलिए लोग सैकड़ाें वर्षों से धर्मयुद्ध लड़ रहे थे। मैं अपने मां-बाप का इकलौता बेटा हूं। अयोध्या में आंदोलन के दौरान जब मुझे गोली लगी तो मेरी मां रोने लगी। घरवालों की परेशानी के चलते मैंने अपना इलाज गोरखपुर के अस्पताल में कराया। सोमवार की दोपहर में जब मंदिर में श्रीराम लला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी, तो मन इतना आनंदित था कि उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता। बस इतना समझ लिजिए कि 33 साल पहले गोली लगने से जो दर्द मिला था, आज जाकर उससे आराम मिला है। आज का दिन असंख्य कारसेवकों के बलिदान का परिणाम है। इसलिए हर कारसेवक के घर में आज दिवाली है।-आद्या सिंह, कारसेवक
आध्यात्म के साथ रोजगार का केंद्र बनेगी अयोध्या
अयोध्या को अगर देश के नक्शे के हिसाब से देखें तो वह केंद्र में है। इसीलिए त्रेता युग में इसे अवधपुरी की राजधानी बनाया गया होगा। मंदिर निर्माण के साथ यह शहर अब औद्योगिक केंद्र भी बनेगा। पहले की अयोध्या और आज की अयोध्या में जमीन आसमान का अंतर है। यह शहर सड़क, रेल और हवाई मार्ग से केवल इसलिए नहीं जुड़ रहा कि यहां लोग मंदिर का दर्शन करने आएंगे। बल्कि, यह आने वाले समय में वाराणसी, मथुरा, उज्जैन की तरह ही धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र होगा। अयोध्या के विकास के साथ पूर्वांचल का विकास होगा। आज अयोध्या में तमाम नए होटल और रेस्टोरेंट खुल रहे हैं। लोग वहां घर खरीद रहे हैं तो अयोध्या में हो रहे बदलाव को समझ सकते हैं।- एसके अग्रवाल चेंबर ऑफ इंड्रस्टी के तत्कालीन सचिव एसके अग्रवाल