राम मंदिर : प्रयागराज में राम पर रचे रागों से राममय होगा देश, सभी रेडियो स्टेशनों से होगा प्रसारण
जन कवि कैलाश गौतम के लिखे लोक रामायण राम रसायन नाट्य रूपक के विलुप्तप्राय हो चुके भजनों से प्राण-प्रतिष्ठा वाले दिन को राममय बनाया जाएगा। महानिदेशालय के निर्देश पर राम के जन्म से लेकर वनवास तक के संपूर्ण चरित्र पर आधारित 26 लोक भजनों की रिकार्डिंग आकाशवाणी ने कराई है।
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हम ना लेबै उतराई हे मालिक ना लेबै उतराई/दुनिया के जे पार लगवलस ओसे हम का लेबै...। लोक मानस में रचे-बसे जन कवि कैलाश गौतम के ये कालजयी लोक भजन जन्मभूमि पर रामलला के विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा वाले दिन पूरे देश में गूंजेंगे। देश को राममय बनाने के लिए प्रसार भारती ने प्रयागराज में रचे गए दुर्लभ लोक धुनों को चुना है।
जन कवि कैलाश गौतम के लिखे लोक रामायण राम रसायन नाट्य रूपक के विलुप्तप्राय हो चुके भजनों से प्राण-प्रतिष्ठा वाले दिन को राममय बनाया जाएगा। महानिदेशालय के निर्देश पर राम के जन्म से लेकर वनवास तक के संपूर्ण चरित्र पर आधारित 26 लोक भजनों की रिकार्डिंग आकाशवाणी ने कराई है। इन भजनों की रिकार्डिंग महानिदेशालय भेजी जाएगी। लोक रामायण रामरसायन नाट्य रूपक गोवर्धन भैया के नाम से मशहूर रहे कवि कैलाश गौतम ने वर्ष 1997 में लिखा था।
प्रसार भारती की महानिदेशक वसुधा गुप्ता के निर्देश पर जब इस नाट्य रूपक की तलाश शुरू हुई तब पता चला कि पूरी रिकार्डिंग खराब हो चुकी है। इसके बाद उनके हस्तलेख से किसी तरह 36 में से 26 भजनों को नए सिरे से रिकाॅर्ड कराया गया। इसमें कहरवा, दादरा, चौताल और कजरी, सोहर जैसी लोक धुनों में राम पर आधारित भजन प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में आकाशवाणी अयोध्या धाम समेत पूरे देश में बजाए जाएंगे।
आकाशवाणी के निदेशक लोकेश शुक्ल ने बताया कि लोक रामायण के भजनों की तीन दिन की लंबी मशक्कत के बाद रिकार्डिंग करा ली गई है। इसमें प्रभु श्री राम के जन्म, विश्वामित्र के साथ यज्ञ की रक्षा के लिए जाने के अलावा राम वन गमन के प्रसंगों पर आधारित भजन शामिल किए गए हैं। इन भजनों को आकाशवाणी के एक ग्रेड के कलाकारों ने लयबद्ध किया है।
प्रभु श्रीराम पर आधारित इस नाट्य रूपक को अर्काइव से निकाला गया तो उसकी रिकॉर्डिंग इस्तेमाल के लायक नहीं रह गई थी। ऐसे में किसी तरह उनके हस्तलेखों को एकत्र किया गया। इसमें से 36 की जगह 26 भजनों की रिकॉर्डिंग करा ली गई है। इसमें भगवान राम के विविध रूपों और उनके जीवन के आदर्शों के भजनों में पिरोया गया है। प्राण-प्रतिष्ठा के दिन इन भजनों को आकाशवाणी के सभी केंद्रों से एक साथ प्रसारित किया जाएगा। - लोकेश शुक्ला- निदेशक, आकाशवाणी प्रयागराज