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प्राण प्रतिष्ठा समारोह: पाकिस्तान से आए परिवार की 3 पीढ़ियों ने राम मंदिर के लिए किया संघर्ष, जानें पूरी कहानी
Fri, 05 Jan 2024 10:52 AM IST
नवीन दलाल
नागेश शर्मा, हिसार (हरियाणा)
नागेश शर्मा, हिसार (हरियाणा)
Published by: नवीन दलाल
Updated Fri, 05 Jan 2024 10:52 AM IST
सार
सुरेंद्र लाहोरिया बताते हैं कि 1990 में कार सेवा का आह्वान हुआ तो पिता मोहन लाल, दोनों चाचा महेंद्र व मदन के साथ वह पहचान छिपाकर अयोध्या पहुंचे। हनुमान गढ़ी में अशोक सिंघल का संबोधन चल रहा था। तेज बारिश थी, इसी दौरान हंगामा शुरू हुआ और पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।
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सुभाष चंद्र बोस की टीम के साथ सेठ जुगल किशोर लाहोरिया
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अयोध्या में प्रभु राम के मंदिर के निर्माण के लिए बंटवारे के दौरान पाकिस्तान से आए परिवार की तीन पीढ़ियों ने संघर्ष किया। दादा ने प्रदेश में आंदोलन की रणनीति बनाई तो बेटों और पोते ने कार सेवा के दौरान अयोध्या में 1992 में बाबरी ढांचा ढहाने में भी भूमिका निभाई।
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देश में आपातकाल के दौरान पौने दो साल तक जेल की सजा काटने वाले सेठ जुगल किशोर लाहोरिया हरियाणा में राम मंदिर आंदोलन की रणनीति बनाने वालों में शामिल रहे थे। वह देश के बंटवारे के दौरान पाकिस्तान के लाहौर से भारत आए थे। राम मंदिर आंदोलन में सेठ जुगल किशोर के बेटे मोहन लाल लाहोरिया, महेंद्र व मदन, मोहन लाल के दो बेटे सुरेंद्र और अश्वनी सक्रिय रहे। तब सुरेंद्र की उम्र 20 वर्ष और अश्वनी की उम्र करीब 16 वर्ष थी। आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अशोक सिंघल, प्रवीण भाई तोगड़िया, साध्वी ऋतंभरा, मनोहर लाल आदि सभी प्रमुख नेता उनके घर आते रहे हैं। उन दिनों नरेंद्र मोदी हरियाणा के प्रभारी भी थे।
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1990 : जंगल-झाड़ियों में भागकर रेलवे स्टेशन तक पहुंचे
सुरेंद्र लाहोरिया बताते हैं कि 1990 में कार सेवा का आह्वान हुआ तो पिता मोहन लाल, दोनों चाचा महेंद्र व मदन के साथ वह पहचान छिपाकर अयोध्या पहुंचे। हनुमान गढ़ी में अशोक सिंघल का संबोधन चल रहा था। तेज बारिश थी, इसी दौरान हंगामा शुरू हुआ और पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। गोलियां चलने लगीं। वहां से जंगल-झाड़ियों में भागकर रेलवे स्टेशन तक पहुंचे। ट्रेन में सवार होकर रात ढाई बजे हिसार पहुंचे। पिताजी बिछड़ गए तो रास्ते में उनकी चिंता सताती रही। बाद में फोन पर उनसे संपर्क हुआ तब राहत मिली।
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1992: पिता पत्रकार बनकर अयोध्या पहुंचे तो छोटे बेटे ने हिसार में काटी जेल
अश्वनी लाहोरिया बताते हैं कि 1992 में वह 12वीं के छात्र थे और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय थे। पिता मोहनलाल पत्रकार बनकर अयोध्या पहुंचे तो उन्हें आसानी से गुंबद के पास जाने का मौका मिल गया। चाचा मदन भी परिसर में रहे। हिसार में अश्वनी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। शाम करीब सात बजे पिताजी का फोन आया और उन्होंने परिजनों को ठीक होने की जानकारी दी, तब राहत मिली।
1989 में यूपी के कारीगर बुलाकर तैयार कराया राम मंदिर का मॉडल
हिसार में जब राम मंदिर आंदोलन चल रहा था तो 1989 में मोहन लाल लाहोरिया ने उत्तर प्रदेश से कारीगर बुलाकर राम मंदिर का मॉडल तैयार कराया था। इसी मॉडल के सहारे ही राम मंदिर के सभी आंदोलनों को गति दी गई। सुरेंद्र लाहोरिया बताते हैं कि यह मॉडल उन्होंने अपने घर पर सजाकर आज भी सुरक्षित रखा है।